हर जिले में ‘साहित्यिक एवं ज्ञान परंपरा केंद्र’ बनें: अनिल सक्सेना ‘ललकार

हर जिले में ‘साहित्यिक एवं ज्ञान परंपरा केंद्र’ बनें: अनिल सक्सेना ‘ललकार

हर जिले में ‘साहित्यिक एवं ज्ञान परंपरा केंद्र’ बनें: अनिल सक्सेना ‘ललकार’

पाली साहित्यिक संवाद: नई पीढ़ी को संस्कृति, साहित्य और ज्ञान परंपरा से जोड़ने की पहल

“कलमकारों और कलाकारों ने साहित्य, संस्कृति एवं ज्ञान परंपरा के संरक्षण का संकल्प लिया”

पाली, 11 अप्रैल।राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के बैनर तले वर्ष 2010 से प्रदेश के प्रत्येक जिले और उनकी पंचायतों में संचालित 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के अंतर्गत शनिवार को पाली के होटल मोनार्क में ‘पाली साहित्यिक संवाद’ आयोजित हुआ। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्यापक चर्चा की गई तथा जिलेभर के साहित्यकारों, कलाकारों और युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने अपने संबोधन में आधुनिकता, शिक्षा प्रणाली और समाज की भूमिका को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि क्या हम आधुनिकता के नाम पर अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होते जा रहे हैं तथा क्या आज का युवा भारतीय ज्ञान परंपरा से कटता जा रहा है।

उन्होंने केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा से जोड़ने का स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि क्या यह व्यवस्था ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हो पाई है। उन्होंने नीति और उसके क्रियान्वयन के बीच के अंतर को गंभीर चिंता का विषय बताया।

इस अवसर पर अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने प्रस्ताव रखा कि 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के तहत प्रदेश के प्रत्येक जिले में ‘साहित्यिक एवं ज्ञान परंपरा केंद्र’ स्थापित किए जाएं, जो साहित्य, लोककला और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के साथ युवाओं को जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकें।

मंचासीन साहित्यकार पवन पांडेय ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और इसके माध्यम से सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण संभव है। साहित्यकार वीरेंद्र लखावत ने लोक परंपराओं और क्षेत्रीय साहित्य के संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

साहित्यकार देवराज शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया। वरिष्ठ पत्रकार अरुण जोशी ने कहा कि मीडिया और साहित्य मिलकर समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। युवा रचनाकार चित्रांशी रायजादा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति, भाषा और साहित्य से जुड़कर अपनी पहचान को सशक्त बनाएं।

कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं में मौजूद कलमकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने भी सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने सवाल रखे और अपने विचार व्यक्त किए, जिससे संवाद और अधिक सार्थक एवं जीवंत बन गया।

वक्ताओं ने चर्चा के दौरान कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्स्थापन के लिए साहित्यकारों, शिक्षकों और समाज के सभी वर्गों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। वरिष्ठ पत्रकार ओम चतुर्वेदी ने पाली की सांस्कृतिक चेतना को पूरे राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रारंभ में फोरम के प्रदेश सचिव हेमंत साहू ने स्वागत भाषण देते हुए फोरम की गतिविधियों एवं साहित्यिक आंदोलन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों एवं युवाओं को साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सामूहिक शपथ दिलाई गई।

वक्ताओं ने राज्य सरकार से मांग की कि भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक साहित्य एवं स्थानीय कलाओं को शिक्षा प्रणाली एवं सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता दी जाए तथा इन प्रस्तावित केंद्रों को राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन एवं समाज के सहयोग से विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह पहल युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण की मजबूत आधारशिला बन सकती है।

दूसरे सत्र की काव्य गोष्ठी में रशीद गौरी, साबिर सागिर, पारस भाटी, डॉ. दिलीप बच्चानी, दलपत सिंह राजपुरोहित, श्रीराम कोमल, मांगू सिंह, बरखा जैन, आर.एस. भटनागर, हरीश व्यास, गोरू सिंह राजपुरोहित, बिशन सिंह भाटी, महेंद्र मेहता, महेंद्र सिंह लखावत, नाथू सिंह राजपुरोहित, सत्यनारायण राजपुरोहित, उमाशंकर द्विवेदी, प्रेम रतन शर्मा, मनीष कुमार, एन.के. राजा सहित अन्य कवियों ने काव्य पाठ किया।

कार्यक्रम का समापन आभार प्रदर्शन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। संचालन कवि एवं बाल साहित्यकार नवनीत रुचिर ने किया तथा आभार साहित्यकार के.के.सिंघल ने प्रकट किया। आयोजकों ने इसे पाली की साहित्यिक दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पहल बताया।

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