मरकर भी अमर हो गई सादड़ी की दाकू बाई
मरकर भी अमर हो गई सादड़ी की दाकू बाई पाली। आई बैंक सोसायटी ऑफ़ राजस्थान पाली चैप्टर द्वारा चलाए जा रहे देहदान महादान कार्यक्रम से प्रभावित होकर सादड़ी निवासी दाकू बाई पुनमिया धर्मपत्नी स्वर्गीय भंवरलाल पूनमिया ने अपने जीते जी अपने पुत्र दिनेश कुमार देवर नरेश कुमार पुत्रवधू रेखा पौत्री निधि एवं पौत्र ध्रुव पुनमिया से अपने निधन के बाद अपना पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को दान करने की इच्छा जताई थी। परिजनों ने दिवंगत की इच्छा का सम्मान करते हुए पाली मेडिकल कॉलेज को दिवंगत की पार्थिव देह दान की। तब उन्होंने केवल एक पार्थिव शरीर ही नहीं सोपा बल्कि सैकड़ो भावी डॉक्टरो के भविष्य को दिशा प्रदान की। यह वो कदम है जो समाज को चेतना संवेदनशीलता एवं विज्ञान के लिए सहयोग देने की प्रेरणा प्रदान करता है। आज प्रातः दाकू बाई के निधन के समाचार मिलते ही दिवंगत के रिश्तेदार डॉक्टर राजेंद्र पूनमिया गौतम कुमार पुनमिया कमल पूनमिया जीवनराज पुनमिया ने परिजनों की स्वीकृति से आई बैंक सोसायटी आफ राजस्थान पाली चैप्टर के अध्यक्ष हुक्मीचंद मेहता से दिवंगत के देहदान के लिए संपर्क किया। इस अवसर पर अध्यक्ष मेहता ने कहा कि जीवन का अंतिम अध्याय अक्सर शांति और विराम से जुड़ा होता है पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इस अंत को एक नई शुरुआत बना देते हैं किसी और के लिए ताकि वे सफल डॉक्टर बनकर मानव समाज की सेवा कर सके । दाकू बाई जैसे लोग जिन्होंने जीवन के बाद भी समाज के लिए कुछ करने की ठानी और देहदान जैसा महान कार्य कर मिसाल कायम की।मेहता ने एएनएम कॉलेज प्राचार्य कै सी सैनी डॉक्टर प्रतिभा गर्ग भंवरलाल सेमलानी मास्टर जितेंद्र सिंह चालक करीम खान के सहयोग से देहदान की प्रक्रिया संपन्न करवाई । इस अवसर पर अध्यक्ष मेहता ने कहामेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल डॉक्टर अनूप गुर्जर ने बताया कि मेडिकल छात्रों के लिए असली मानव शरीर का अध्ययन करना उनकी चिकित्सा यात्रा का मूल आधार है। पुस्तकों में पढ़ाया गया मानव शरीर जब प्रयोगशाला में जीवंत अनुभव बनता है तो डॉक्टर बनना केवल सपना ही नहीं समझ बन जाता है । इस अवसर पर दिवंगत के परिजनों को मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर किरण कंवर डॉक्टर अदिति लैब टेक्नीशियन अरुण सिंगारिया अर्जुन राम मोहन एवं भैराराम ने पार्थिव शरीर को ससम्मान रिसीव कर परिजनों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया.