शिक्षा, सादगी और भाईचारे की मिसाल थे हाजी नसरुद्दीन साहब

शिक्षा, सादगी और भाईचारे की मिसाल थे हाजी नसरुद्दीन साहब

शिक्षा, सादगी और भाईचारे की मिसाल थे 'हाजी नसरुद्दीन साहब'

गोड़वाड़ मेड़तिया सिलावट समाज ने खोया एक अनमोल रत्न: पूर्व सदर हाजी नसरुद्दीन जी का इंतकाल

रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

बालोतरा | ऑल राजस्थान मुस्लिम सिलावट सेवा संस्थान के प्रदेश मीडिया प्रभारी अयूब के. सिलावट ने बताया कि गोड़वाड़ मेड़तिया सिलावट समाज के पूर्व सदर, हाजी नसरुद्दीन जी वल्द मरहूम लाल मोहम्मद साहब निवासी शिवगंज हाल अहमदाबाद के इंतकाल की खबर सुनकर समाज और गोड़वाड़ क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

गम की इस घड़ी में, ऑल राजस्थान मुस्लिम सिलावट सेवा संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष हाजी अब्दुल अजीज साहब भीलवाड़ा, प्रदेश उपाध्यक्ष मोहम्मद अयूब साहब जालौर, प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहिद साहब मेड़ता सिटी, प्रदेश कोषाध्यक्ष एडवोकेट अब्दुल सलीम साहब गोरी केकड़ी, प्रदेश कार्यक्रम अधिकारी मोहम्मद यासीन साहब, प्रदेश संगठन मंत्री मोहम्मद बशीर साहब बशीर साहब सहित संस्थान के सभी प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षो और सदस्यों ने भी अज़ीम शख्सियत को खिराजे अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश कर गम का इजहार किया l समाजजनों ने यह अहद (संकल्प) लिया है कि उनके आदर्शों—विशेषकर शिक्षा और भाईचारे—को क़ायम रखा जाएगा, यही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अल्लाह तआला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और उनके गमज़दा (दुखी) अहल-ए-ख़ाना (परिवार) को सब््र-ए-जमील (धैर्य) की तौफ़ीक़ (शक्ति) बख्शे। आमीन।

हाजी नसरुद्दीन जी ने पुलिस विभाग में वरिष्ठ अधिकारी पद पर अपनी सेवाएँ दीं, लेकिन उनकी पहचान हमेशा उनकी सादगी, ईमानदारी और विनम्र स्वभाव के कारण बनी रही। उच्च पद के बावजूद उनका ज़मीनी जुड़ाव और खुद्दारी हमेशा बरकरार रही, जो उन्हें हर वर्ग में 'अज़ीज़' (प्रिय) बनाती थी।

हाजी साहब की शिक्षाएं और उनके आदर्श हमारे लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। सिलावट समाज के लिए इसे एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है, क्योंकि हाजी साहब निःस्वार्थ सेवा की जीती-जागती मिसाल थे।

प्रदेश सचिव मोहम्मद शाहिद सिलावट ने बताया कि हाजी नसरुद्दीन साहब पाली में ऑल राजस्थान मुस्लिम सिलावट वैलफेयर संस्थान के प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होकर पाली जिलाध्यक्ष जनाब अजीज दर्द का सम्मान भी किया था और हमारे मिशन मुस्लिम सिलावट विकास बोर्ड और एम.बी.सी.आरक्षण के लिए संघर्ष में हरसंभव सहयोग का वादा किया था।

           इंतकाल की खबर सुनकर अभी तक विश्वास भी नहीं हो रहा है। मुझे इनके द्वारा कहे गए ये शब्द ताउम्र याद रहेगे-अपना काम ईमानदारी से करते रहो। लोगों के कमेंट की परवाह मत करना।काम करने वाले की ही लोग कमियां निकालते हैं।जो कोई काम ही नहीं करते।उनकी कैसे कमियां निकालेंगे।

हाजी नसरुद्दीन जी का सबसे बड़ा योगदान समाज को एकजुटता के सूत्र में पिरोना था। उन्होंने अपने जीवनकाल में शिक्षा पर बल दिया l बच्चों और बेटियों को शिक्षा की अहमियत समझाते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया। यह उनके जीवन का अमूल्य सबक था l उन्होंने भाईचारे और मानवीय मूल्यों को समाज में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। उनका जीवन युवा पीढ़ी के लिए यह सीख है कि सच्ची इज़्ज़त (सम्मान) पद से नहीं, बल्कि नेक नीयत और ख़ुश अख़लाक़ी (अच्छे व्यवहार) से मिलती है।