डबल मर्डर के मुलजिम प्रकाश को आजीवन कारावास की सजा
डबल मर्डर के मुलजिम प्रकाश को आजीवन कारावास की सजा
धारा 302 में आजीवन कारावास व 50 हजार अर्थदंड, धारा 397 में 7 वर्ष कठोर कारावास, धारा 201 में 3 वर्ष कठोर कारावास
सोजत। निकटवर्ती बगड़ी थाना क्षेत्र के कंटालिया गांव में वर्ष 2021 में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले में एडीजे कोर्ट सोजत ने दिनांक 26 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रेखा रानी ने अभियुक्त प्रकाश पुत्र चिमनाराम प्रजापत, निवासी रामासनी बाला को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।अभियुक्त को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में अलग-अलग सजा से दंडित किया।
न्यायालय ने अभियुक्त को धारा 302 भारतीय दंड संहिता के अपराध में आजीवन कारावास एवं 50,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
धारा 397 भारतीय दंड संहिता के अपराध में 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
धारा 201 भारतीय दंड संहिता के अपराध में 3 वर्ष का कठोर कारावास एवं 10,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
इस प्रकार न्यायालय द्वारा अभियुक्त को तीनों धाराओं में दोषी ठहराते हुए उक्त सजाएं सुनाई गईं।
यह था पूरा मामला
अपर लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी ने बताया कि दिनांक 6 दिसंबर 2021 को परिवादी रमेश पुत्र खीवाराम प्रजापत, हाल निवासी बैंगलोर ने बगड़ी अस्पताल की मोर्चरी में रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उसकी गोद ली हुई मां अमरती देवी एवं बहन उकिया देवी कंटालिया गांव में रहती थीं। दोनों की किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा हत्या कर दी गई थी। मकान के दरवाजे पर ताला लगा हुआ था तथा दोनों के शव घर के अंदर पड़े थे। शवों से बदबू आने पर आसपास के लोगों को घटना की जानकारी हुई।
परिवादी को उसके बहनोई द्वारा बैंगलोर में फोन पर घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद वह मौके पर पहुंचा और रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट पर पुलिस थाना बगड़ी में प्रकरण संख्या 173/2021 दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया गया।
पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अनुसंधान करते हुए अभियुक्त प्रकाश पुत्र चिमनाराम प्रजापत निवासी रामासनी बाला के विरुद्ध धारा 302, 201 एवं 397 भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया।
30 गवाह, 55 दस्तावेज और 21 आर्टिकल हुए प्रदर्शित
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 30 गवाहों को परीक्षित कराया गया। इसके साथ ही 55 दस्तावेज तथा 21 आर्टिकल (भौतिक साक्ष्य) न्यायालय के समक्ष प्रदर्शित करवाए गए।
अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक पंकज त्रिवेदी एडवोकेट ने परिस्थितिजन्य, मौखिक, दस्तावेजी एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी पैरवी की तथा अभियुक्त के विरुद्ध आरोप सिद्ध करने के संबंध में न्यायालय के समक्ष विधिक तर्क प्रस्तुत किए।
न्यायालय ने प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं अभियोजन पक्ष के तर्कों पर विचार करने के पश्चात 26 सितंबर 2026 को अपना फैसला सुनाते हुए अभियुक्त प्रकाश को दोषी करार दिया और उपरोक्त सजाओं से दंडित किया।