डीडीहाट में 3 दिवसीय राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठी संपन्न
डीडीहाट में 3 दिवसीय राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठी संपन्न
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही
डीडीहाट (पिथौरागढ़)। अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी/बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट के संयुक्त तत्वावधान में डायट डीडीहाट,पिथौरागढ़,उत्तराखंड में 12,13 एवं 14 जून को आयोजित राष्ट्रीय बालसाहित्य संगोष्ठी में ‘बालसाहित्य और बच्चे’, 'बालसाहित्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण’, ‘बालसाहित्य और सोशल मीडिया’, उत्तराखंड का बालसाहित्य’ विषय पर आयोजित अलग-अलग सत्रों में बालसाहित्य के विभिन्न पक्षों पर चर्चा हुई। बालसाहित्य शोध संस्थान दरभंगा के निदेशक डाॅ. सतीशचंद्र भगत(दरभंगा), बालसाहित्य संस्थान हरियाणा की निदेशक डाॅ. शील कौशिक (सिरसा) ,जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान अजमेर, राजस्थान की वरिष्ठ प्रवक्ता एवं बालसाहित्यकार डाॅ. चेतना उपाध्याय, बालवाटिका पत्रिका की सह संपादक रेखा लोढ़ा(भीलवाड़ा, राजस्थान), डाॅ. इंदु गुप्ता (फरीदाबाद हरियाणा),भारत ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड के हेमंत जायसवाल(धनबाद), उत्तराखंड भाषा संस्थान के सदस्य डाॅ. हयातसिंह रावत, डायट बागेश्वर के प्राचार्य चक्षुष्पति अवस्थी, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान अल्मोड़ा के पूर्व प्राचार्य गोपालसिंह गैड़ा, बच्चों की बगिया पत्रिका के संपादक लखन प्रतापगढ़ी ( प्रयागराज,उ.प्र.) , हरदेव धीमान(शिमला,हि.प्र.) ,बंगला भाषा के लेखक अभिक कुमार डे(अगरतला,त्रिपुरा) , डायट डीडीहाट के पूर्व प्राचार्य दुष्यंतसिंह पांगती, रश्मि अग्रवाल (दिल्ली), डॉ रामदुलार सिंह पराया (मिर्जापुर), डाॅ. अशोक गुलशन(बहराइच), मानस एकेडमी पिथौरागढ़ के चेयरमैन शिक्षाविद् डाॅ. अशोक पंत(पिथौरागढ़) , बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के अध्यक्ष रतनसिंह किरमोलिया, किताब कौतिक अभियान/क्रिएटिव उत्तराखंड के हेम पंत,कन्हैया साहू ‘अमित’(भाटापारा,छत्तीसगढ़), रजनीकांत शुक्ल(गाजियाबाद), रूखसाना बानो(मिर्जापुर), कविता मुकेश (बीकानेर), उत्तराखंड के पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डा एल. एम. उप्रेती, राजकीय इंटर कालेज डीडीहाट के प्रधानाचार्य प्रेमसिंह पापड़ा, भारत ज्ञान विज्ञान समिति की प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं सोबनसिंह जीना विश्व विद्यालय अल्मोड़ा की शिक्षा संकाय की पूर्व अध्यक्ष डॉ विजय रानी ढौढियाल, दीवार पत्रिका अभियान के महेश पुनेठा सहित 14 राज्यों के 116 साहित्यकारों के साथ ही डायट के 80 प्रशिक्षुओं ने प्रतिभाग किया।
संगोष्ठी का उद्घाटन बच्चों ने दीप प्रज्वलित करके किया। देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ साहित्यकारों ने बच्चों को बैज पहिनाकर सम्मानित किया। 3 सत्रों में बच्चों की सक्रिय सहभागिता रही। बाल कवि सम्मेलन में जहां बच्चों ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया, वहीं बालकवि सम्मेलन के अध्यक्ष, अतिथि तथा संचालक बच्चे ही थे। कविता वाचन तथा कहानी वाचन सत्र में देश के विभिन्न राज्यों से आए चयनित कवियों व कहानीकारों ने अपनी रचनाएं पढ़ी। जिनकी समीक्षा बच्चों ने की। देश के विभिन्न राज्यों से प्रकाशित दुलर्भ 90 बाल पत्रिकाओं की प्रदर्शनी विशेष आकषर्ण का केंद्र रही। 84 छोटे बच्चों तथा 80 डीएलएड प्रशिक्षुओं की हस्तलिखित पुस्तकों की प्रदर्शनी को भी साहित्यकारों ने सराहा। 12 तथा 13 जून की सायं दो चरणों में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में 72 कवियों ने बाल कविताएं पढ़ी। 13 जून की सुबह पक्षी विशेषज्ञ राजेश भट्ट के निर्देशन में आयोजित प्रकृति भ्रमण में साहित्यकारों ने उत्तराखंड के पक्षी जगत एवं जैव विविधता को जाना।
प्रो. जगतसिंह बिष्ट, डाॅ. अशोक गुलशन, लक्ष्मी खन्ना ‘सुमन’, कैलाश डोलिया,परमेश्वरी शर्मा, यामिनी जोशी, डाॅ. दीपा कांडपाल,उदय किरौला,दीक्षा जोशी, सुधा भार्गव,कलावती साहित्य पुरस्कार ट्स्ट, पुष्पलता जोशी दातव्य न्यास तथा शिक्षाविद् के.पी.एस.अधिकारी के सहयोग से डाॅ. महावीर रवांल्टा,दीक्षा जोशी, रूखसाना बानो, डाॅ. इंदु गुप्ता,कन्हैया साहू ‘अमित’, अनिल कुमार निलय, लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव सहित 23 बालसाहित्य रचनाकारों को सम्मान पत्र, प्रतीक चिह्न,पत्रम पुष्पम के साथ ही शाॅल ओढाकर सम्मानित किया गया। संगोष्ठी में बालसाहित्य की एक दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। आमंत्रित सभी साहित्यकारों को किताब कौतिक अभियान/क्रिएटिव उत्तराखंड के सौजन्य से प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट के प्राचार्य भाष्करानंद पांडे ने संगोष्ठी में सभी का स्वागत करते कहा कि संगोष्ठी से जहां बालसाहित्य को एक नई दिशा मिलेगी, वहीं नवोदित बालसाहित्य रचनाकारों तथा डायट के डीएलएड प्रशिक्षुओं को भी इसका लाभ मिलेगा। अंत में बालप्रहरी के संपादक एवं बालसाहित्य संस्थान के सचिव उदय किरौला ने सभी का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी के प्रत्येक सत्र की शुरूआतें गिरीश तिवारी गिर्दा, हीरा सिंह राणा, केदारनाथ अग्रवाल तथा के जनगीतों से की गई।