ग़ज़ल- वो ज़िन्दा है मगर ज़िन्दा नही है

ग़ज़ल- वो ज़िन्दा है मगर ज़िन्दा नही है

ग़ज़ल- वो ज़िन्दा है मगर ज़िन्दा नही है

THE BHASWAR TIMES  BY TOP UPDATE 

1

हिमायत हक़ की जो करता नही है

वो ज़िन्दा है मगर ज़िन्दा नही है

2

जो बन्दा मौत से डरता नही है

वो मर के भी कभी मरता नही है

3

बड़ो से झुक के मिलना ऐ अज़ीज़ो

ये इक तहज़ीब है सजदा नही है

4

तज़मीन

शिकायत सिर्फ़ अपनी ज़ात से है

ज़माने से मुझे शिकवा नहीं है

5

उसी को एक दिन मिलती है मन्ज़िल

जो चलता है कभी रुकता नही है

6

सर-ए-महफ़िल नुमाइश का तरीक़ा

ये हरगिज़ आप का अच्छा नही है

7

तुम अपने हुस्न को पर्दे में रक्खो

वो बहरा है मगर अंधा नही है

8

यही तो है मोबाइल का करिश्मा

वो बच्चा हो के भी बच्चा नही है

9

वो देकर कह रहे हैं ज़ख्म दिल पर

अभी ये ज़ख्म-ए-दिल गहरा नही है

10

बढ़ा कर फिर क़दम पीछे हटाना

किताब-ए-इश्क़ में लिक्खा नही है

11

किसी के हुस्न का जलवा हो राही

हमेशा के लिए रहता नही है

                         *बादशाह राही*

ग्राम मुहम्मदपुर पोस्ट कैथवलिया

ज़िला गाज़ीपुर उत्तर प्रदेश