क्या भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के बारे मैं सोचेंगे ?
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क्या भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी उत्तराखंड के बारे में सोचेंगे?
आज उत्तराखंड की स्तिथि हर प्रकार से सोचनीय है गाव के गाँव के गाँव खाली हो चुके हैं ,किसी किसी गाँव में तो गिनती के लोग रह गए ,और किसी किसी गाँव में दो या चार बुजुर्ग । लोगों ने पलायन कर लिया है,जिनके पास पैसा है ओ मैदानी शहरों मैं जैसे उत्तराखंड की राजधानी देहरादून मैं जा बसे हैं। कुछ लोग अन्य शहरों मैं अपना निवास स्थान बना लिए हैं ,जिनके के पास धन का अभाव है ,या तो ओ लोग ही रह गए हैं या जिनका कारोबार उत्तराखंड मैं चल रहा है,मकानों पर ज्यादातर ताले लग चुके हैं,कुछ तो टूटकर खंडहर बन चुके हैं । यह स्तिथि तो हर गाँव में देखने को मिलेगी । कभी उत्तराखंड हरभरा रहता था आज के परिवेश में उत्तराखंड की स्तिथि दयनीय है । हर साल लोगों की जनसख्या घाट रही है,दो चार परिवार हर साल पलायन कर जाते हैं। कारण कई हैं,सबसे बड़ा कारण रोजगार है,दूसरा स्वास्थ्य सुविधाएँ तीसरा है प्राकृतिक आपदा । लोगों ने खेती करना बंद कर दिया है कई जगह जिसका कारण पता किया तो पता चल है की जंगली जानवर खेती का भारी नुकसान कर रहे हैं,कुछ लोगों का कहना है की सरकार फ्री का रासन दे रही है तो क्या जरूरत है खेती करने की क्यों मेहनत करें जब फ्री का मिल रहा है । हर गाँव मैं गौ माताओं की दुर्गति हो रही है जो दूध नहीं देती उसके साथ भयंकर अत्याचार हो रहा है उसे ऐसी जगह भेज दिया जाता है जहां वह तड़प तड़प करके मार जाए या फिर उसे जंगल में पेड़ पर बांध दिया जाता है और उसका मुहँ बांध दिया जाता है ताकि वह रंभा न सके क्योंकि रंभा ने से कोई दयालु आदमी उसे खोल देगा और वह अपनी गौ शाला मैं वापस या जाएगी । कई संत महापुरुष उत्तराखंड मैं आ रही प्राकृतिक आपदाओं की को गौ की दुर्गति से भी जोड़ रहे है ,परंतु उत्तरखंड के वासी इस कुकरम और जघन्य अपराध से बाज नहीं आने वाले जब तक देश में गौ हत्यारों पर सख्त कानून नहीं आएगा । मोदी जी गाय की बछिया के साथ फोटो तो खूब शेयर करते हैं लेकिन कानून कब लाएंगे यह तो समय ही बताएगा