किसी उदास शाम की तरह ढले जा रहे है
किसी उदास शाम की तरह ढले जा रहे है
THE BHASWAR TIMES
BY, ANJU JANGID RADHE
किसी उदास शाम की तरह ढले जा रहे है!
चरागो की तरह दिन रात जले जा रहे हैं !!
मुसाफ़िर हैं हम किसी अनजान राहो का!
मंजिल का पता नहीं बस चले जा रहे हैं !!