कुछ था जो उबलता रहा मन में

कुछ था जो उबलता रहा मन में

कुछ था जो उबलता रहा मन में

THE BHASWAR TIMES 

By:- ANJU JANGID RADHE 

कुछ था जो 
उबलता रहा मन में  
भावनाएं एहसास 
अथाह प्रेम नफरत
टूटना फिर जुड़ना
धीरे धीरे ठंडा हुआ
फिर जम गया
।।

देखा एक पहाड़ खड़ा है 
सामने सर्द, उदास सा
फिर धूप आई
छुआ उसे प्यार से
और एक नदी बह चली...
सब पिघलता चला गया 
।।