हजार मंदिर नए बनाओ या एक प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार कराओ पुण्य बराबर - प्रद्युम्न शास्त्री
हजार मंदिर नए बनाओ या एक प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार कराओ पुण्य बराबर - प्रद्युम्न शास्त्री
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डेह / श्री चन्द्रप्रभु अति प्राचीन जिनालय डेह में आज सम्पन्न हुए याग विधान व वेदी शुद्धि तथा भगवान विराजमान समारोह में पंडित प्रद्युम्नकुमार शाश्त्री ने विधिवत मंत्रोच्चार सहित विश्व शांति हितार्थ किये यज्ञ में बोलते हुए कहा कि बड़े भाग्य से किसी की चंचल लक्ष्मी का उपयोग धार्मिक कार्यक्रमों में होता है ।उन्होंने कहा कि आज के युग में हर क्षेत्र में युवा वर्ग जितना पद भर्मित होता जा रहा है उसको लेकर भविष्य की चिंता आज के अभिभावकों को प्राथमिकता से करने की महती आवश्यकता है जिसके लिए सबी को सचेत होने की आवश्यकता है ।
उन्होंने कहा कि जिनके पुण्य प्रबल होते हैं उनके घर मे सद्भावनाएँ निवास करती है पर जो युवा गलत राह की और अग्रसर होने को है उसको सद्ऱाह दिखाना भी बहुत बड़ा पुण्य हैं ।
आज इसी भावना के चलते जयपुर में व्यवसाय रत धर्मश्रेष्ठि श्रीपाल सुरेश सबलावत परिवार नें इस नोसो साल से ज्यादा प्राचीन जिनालय के जिर्णोधार व वेदी निर्माण कार्य को अपने हाथों से सेवा देकर अपने धन का लाखों रुपये लगाकर जो पुण्यार्जन किया है उसका लाभ अनेकोनेक पीढियां उठाएगी ।

इस अवसर पर जिनालय कमेटी के पवन पहाड़िया नें कहा कि यह जिनालय साढ़े नो सो साल पुराना है जिसका सम्पूर्ण जीर्णोद्धार कार्य धर्मश्रेठी हुलाशचन्द - मन्नी देवी सबलावत के दोनों सुपुत्रों ने जयपुर व्यवसाय रत रहते हुए भी अपने समय का दान देते हुए निजी देखरेख में जो जीर्णोद्धार व वेदी निर्माण कार्य करवाया उसके लिए समिति आपकी बारम्बार अनुमोदना करती है ।
इस अवसर पर धर्मप्रेमी युवा रोहित पांड्या का समिति की तरफ से बहुमान करते हुए उनको धर्मनिष्ठ युवा सम्मान की उपाधि से सम्मानित किया गया । चार घण्टे चले कार्यक्रम का संचालन जयपुर के पंडित प्रद्युम्न शास्त्री ने किया । इस अवसर पर आये जयपुर सुजानगढ़ , लाडनू , नागौर आदि जगहों से धर्मप्रेमी श्रावकों ने भाग लेकर पुण्य कमाया । उक्त जानकारी पवन पहाड़िया डेह नागौर द्वारा दी गई।