गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया का रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम आयोजित

गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया का रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम आयोजित

गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया का रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम आयोजित

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

ब्यावर। गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया, यूनिट ब्यावर की ओर से करबला मार्ग,ब्यावर में रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें बड़ी संख्या में संगठन की सदस्यों एवं कार्यकर्ताओं ने शिरकत की।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता, इकरा एजुकेशनल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ जावेद हुसैन ने रमज़ान और रोज़े की फ़ज़ीलत और उद्देश्य पर बोलते हुए बताया कि रमज़ान इंसान के अंदर तब्दीली और इंकलाब का महीना है। इस महीने में अल्लाह ने हर बालिग मुसलमान मर्द व औरत पर पूरे तीस दिनों के रोज़े अनिवार्य किए हैं। 
यह महीना प्रशिक्षण एवं तरबियत का महीना है जिसमें मुसलमान रोज़े के दौरान अपने अंदर से हर तरह की बुराइयों और कमजोरियों को दूर करने की और अपने अंदर तक्वा, परहेजगारी और ईश-परायणता पैदा करने की कोशिश करता है।


यह महीना आत्म नियंत्रण, आत्म–संयम और सब्र का महीना है।
इस महीने में मुसलमान रोज़े के दौरान भूखा और प्यासा रहकर गरीबों की भूख और प्यास को महसूस करता है इसलिए वह ज्यादा से ज्यादा नेकियाँ करने, जरूरतमंदों, गरीबों, यतीमों और बेवाओं की मदद  करने की कोशिश करता है।
उन्होंने बताया कि इसी महीने में ईश्वर ने समस्त मानव जाति के लिए अपना अंतिम संदेश कुरआन अपने अंतिम ईशदूत हज़रत मुहम्मद (सल्ल०) पर अवतरित किया जो समस्त मानव जाति के लिए मार्ग दर्शन है और ऐसी स्पष्ट शिक्षाओं पर आधारित है जो सीधे मार्ग की ओर रहनुमाई करने वाली और सत्य और असत्य का अंतर स्पष्ट कर देने वाली है। अतः हम सभी को इस महीने में ज्यादा से ज्यादा कुरआन का अध्ययन करने, उसको समझने, उस पर अमल करने और दूसरों तक पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए।


इससे पूर्व गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया, यूनिट ब्यावर की सचिव मुस्कान बानो ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इंसान की दुनियावी जिंदगी इम्तिहान की जिंदगी है और उसे मरने के बाद अपनी इस जिंदगी का हिसाब अपने पालनहार ईश्वर को देना होगा। इसलिए उसे इस जिंदगी में नेक काम करने और बुराइयों से बचने की कोशिश करनी चाहिए़ और सभी इंसानों की भलाई के काम करने चाहिए ताकि वो आख़िरत में कामयाब हो सके और जन्नत का मुस्तहिक करार पाए। रमज़ान माह के रोज़े इंसान को नेकियों पर चलने और बुराइयों से दूर रहने की ताकत पैदा करते हैं और इंसान की जिंदगी में तब्दीली पैदा करते हैं।
गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया, यूनिट ब्यावर की अध्यक्ष शमामा बानो ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रमज़ान वो महीना है जिसमें अल्लाह ने तमाम इंसानों की हिदायत और रहनुमाई के लिए अपना कलाम कुरआन नाज़िल किया। साथ ही इस महीने के आखिरी अशरे में एक ऐसी रात रखी है जिसे लैलतुल क़द्र कहा जाता है जो हज़ार महीनों से अफ़ज़ल है। लिहाज़ा हमें इस रात में ज़्यादा से ज़्यादा अल्लाह की इबादत करनी चाहिए और अपने गुनाहों की माफ़ी तलब करनी चाहिए।


अंत में इकरा स्कूल ब्यावर के डायरेक्टर महबूब खान ने सभी का शुक्रिया अदा किया और सबने साथ मिलकर रोज़ा इफ्तार किया और खाना खाया और दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम में जमाअत ए इस्लामी हिंद जिला ब्यावर, अजमेर व राजसमंद के सह सचिव मुमताज अली, गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया, यूनिट ब्यावर की पूर्व सचिव सानिया सोलंकी, ज़ारा हयात,आयशा सोलंकी, आफ़रीन,सिमरन बानो,सुमैया बानो,निर्जरा बानो,माया बानो,अदा कुरैशी, अफ़सरा कुरैशी,मुस्कान बानो,बिल्किस बानो और बड़ी तादाद में लड़कियां और बच्चियां मौजूद थी।