हिन्दी में विश्व भाषा बनने का सामर्थ्य - पहाड़िया
हिन्दी में विश्व भाषा बनने का सामर्थ्य - पहाड़िया
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही की विशेष रिपोर्ट
डेह/नागौर - अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति एवं नेम प्रकाशन डेह की ओर से शनिवार को विश्व हिंदी दिवस पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मण दान कविया ने की। मुख्य वक्ता पवन पहाड़िया ने कहा कि हिंदी भाषा में आज विश्व भाषा बनने का सामर्थ्य है। करोड़ों लोगों के कंठों की हार बनी हुई हिंदी भाषा आज भारत के अतिरिक्त विदेशों में भी सम्पर्क भाषा का दायित्व निभा रही हैं। करोड़ों भारतीय प्रवासियों ने हिंदी को अपने काम काज एवं व्यापार के लिए आधार भाषा बना रखी है।आज भारत चहुंमुखी विकास की ओर अग्रसर है तो विश्व की तीसरी सशक्त शक्ति बनने का माद्दा भी रखता है यह सब कुछ हमारी हिंदी भाषा पर ही निर्भर है। हिन्दी के विकास एवं विस्तार को देखते हुए उसका भविष्य बहुत उज्ज्वल है। गोष्ठी में युवा गीतकार प्रहलाद सिंह झोरड़ा ने कहा कि हिंदी का गरिमामय इतिहास अहिन्दी भाषी लोगों को भी अपनी ओर आकृष्ट कर रही है। हिन्दी में हर वर्ष हजारो कृतियां प्रकाशित हो रही है। हिन्दी के दैनिक समाचार पत्र करोड़ों की संख्या में छपकर ताजा समाचार घर घर तक पहुंचा रहे हैं। हिन्दी भारत के भाल की बिन्दी है। हिन्दी सुसंस्कारित भाषा है इसमें भारत का गौरवमय इतिहास, संस्कृति, परमपराएं, गाथाएं हमें गौरवान्वित कर रही है। हमारे देश के शूरवीर, धर्मवीर, कर्मवीर, दानवीर स़ंतजन,सती नारियों की प्रेरणास्पद कथाएं हिन्दी में भी उपलब्ध है जो बच्चों को सच्चा देशप्रेमी एवं अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा देती है। गोष्ठी के अध्यक्ष लक्ष्मण दान कविया ने कहा कि हिन्दी का हम तहेदिल से सम्मान करते हैं। हम राजस्थानी लोगों ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनने के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए राजस्थानी भाषा की कुर्बानी दी थी। हिन्दी भाषियों को राजस्थानी लोगों का अहसान नहीं भूलना चाहिए। गोष्ठी में श्रीराम वैष्णव, सांवलदान कविया, विशन सिंह कविया,गोपाल तंवर,सोम कविया,फतुराम छाबा, संदीप, नवीन, अरविंद कविया, नंदकिशोर वैष्णव सहित अनेक भाषा प्रेमी जुड़े रहे।