भारतीय सेना के अद्भुत साहस, रणनीति और बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा : फौजी अशोक सेन
भारतीय सेना के अद्भुत साहस, रणनीति और बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा : फौजी अशोक सेन
पूर्व सैनिक संगठन ने मनाया 54 वां विजय दिवस
रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही

सोजत। भारतीय सेना के अद्भुत साहस, रणनीति और बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा उक्त उद्गार पूर्व सेनिक संगठन के सचिव फौजी अशोक सेन ने स्थानीय रामेलाव तालाब स्थित सैन बगेची में पूर्व सेनिक संगठन द्वारा आयोजित 54 वें विजय दिवस पर कार्यक्रम में व्यक्त किए उन्होंने कहा कि विजय दिवस सेना के वीर जवानों के साहस, अटूट समर्पण और पराक्रम की पराकाष्ठा का प्रतीक है। कार्यक्रम के अतिथि सुरेश ओझा ने कहा कि हमारी सेना पर हमें गर्व है हिंदुस्तान की सेना का मुकाबला करना आसान नहीं है। सार्जेंट नाथू सिंह भाटी ने कहा कि देश के उन वीर जवानों को नमन करते है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए उन्होंने 1971 के युद्ध का विस्तृत वर्णन किया।

कार्यक्रम का सरस संचालन करते हुए पूर्व खेल अधिकारी सत्तू सिंह भाटी ने कहा कि 16 दिसंबर 1971… यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास की वह गौरवशाली दास्तान है जो भारतीय सेना के अदम्य साहस की याद दिलाता है। इस अवसर पर कवि कथाकार डॉ रशीद गौरी ने अपने जोशीले अंदाज में कविताएं पेश की। आभार व्यक्त करते हुए संस्थाध्यक्ष सुबेदार पाबू सिंह ने कहा कि विजय दिवस भारत के जाबाज और साहसी वीरों के बलिदान की याद दिलाता है।

कार्यक्रम का आगाज शहीद सैनिकों को 2 मिनट मौन के साथ श्रद्धांजलि देकर किया गया। तत्पश्चात चंद्रशेखर शर्मा व दीपिका शर्मा द्वारा सभी पूर्व सैनिकों का मोतियों की माला पहनाकर अभिवादन किया गया।

कार्यक्रम में सूबेदार चेनाराम देवासी, हवलदार जोग सिंह, रुपाराम, फतेह सिंह राठौड़, मांगीलाल, प्रहलाद शर्मा, अशोक कुमार, हेमसिंह, रामचंद्र गहलोत, ढगल सिंह कंटालिया, गोकुल राम देवासी भेसाणा, कैप्टन मंगल सिंह चौहान, सार्जेंट कैलाश चंद्र व्यास, भामाशाह जवरी लाल बोराणा,अब्दुल गनी ताजक, मोहनलाल राठौड़, जवरी लाल सेन, अब्दुल समद राही सहित कई गणमान्य जन उपस्थित थे।