गोगा नवमी राजस्थान सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में लोकदेवता गोगाजी महाराज (जाहरवीर गोगाजी) की श्रद्धा से मनाई जाती है।

गोगा नवमी राजस्थान सहित उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में लोकदेवता गोगाजी महाराज (जाहरवीर गोगाजी) की श्रद्धा से मनाई जाती है।
मान्यता है कि गोगाजी सर्पों से रक्षा करने वाले लोकदेवता हैं। इसलिए इस दिन लोग उनकी पूजा करके परिवार की सुख-शांति और सर्पदंश से सुरक्षा की कामना करते हैं।
गोगा नवमी क्यों मनाई जाती है?
गोगाजी को वीर योद्धा और लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है।
लोकमान्यता के अनुसार उनका संबंध नाग/सर्प परंपरा से है।
श्रद्धालु गोगाजी की गोगामेड़ी सहित विभिन्न स्थानों पर पूजा-अर्चना करते हैं।
कई जगह निशान, ध्वजा और गोगाजी की छड़ी के साथ जुलूस निकाले जाते हैं।
राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व विशेष श्रद्धा और लोकपरंपराओं के साथ मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता और लोककथाओं में गोगाजी के जीवन से जुड़ी कई कथाएँ मिलती हैं, इसलिए अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और कथाओं में कुछ अंतर भी मिलता है।