सी आई सहित तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान राज कार्य में बाधा के मुकदमे का आरोपी कोर्ट से बरी

सी आई सहित तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान  राज कार्य में बाधा के मुकदमे का आरोपी कोर्ट से बरी

सी आई सहित तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोर्ट ने लिया प्रसंज्ञान

राज कार्य में बाधा के मुकदमे का आरोपी कोर्ट से बरी

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

 न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या 7 जोधपुर के पीठासीन अधिकारी श्रीमान हर्षित हाडा ने राज कार्य में बाधा पहुंचाने के मुकदमे में फैसला सुनाते हुए आरोपी सिकंदर को बरी करने के आदेश दिए एवं क्रॉस केस में मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन सी आई ट्राफिक सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रसंज्ञान लेने के आदेश पारित किया

*बहन ने लड़ी 15 साल कानूनी लड़ाई*

 न्यायालय में परिवाद पेश कर परिवादिया साजिदा खताई ने अपने अधिवक्ता जहीर अब्बास व मोहम्मद अल्ताफ के मार्फत न्यायालय को बताया कि 2011 में सिकंदर व उसका भतीजा सलमान सुबह अपनी मोटरसाइकिल पर काम पर जा रहे थे उसके पीछे ही उनके साथी जाकिर भी मोटरसाइकिल पर चल रहे थे नाकाबंदी के दौरान कांस्टेबल इंद्र सिंह ने सिकंदर की मोटरसाइकिल में आगे के पहिए में डंडा डालकर गिरा दिया और ओलबा देने पर भड़क गया और सिकंदर के साथ बुरी तरह मारपीट की तत्कालीन निरिक्षक दयाराम फाडूदा ने जाब्ता के अन्य पुलिसकर्मी बुला लिए और 8 पुलिसकर्मियों द्वारा सिकंदर को बुरी तरह मारपीट कर चोटे पहुंचाई गई गंभीर रूप से घायल कर दिया और उसे उठाकर वहां से पहले कंट्रोल रूम ले जाया गया फिर सरदारपुरा थाने ले जाया गया और फिर शास्त्री नगर थाने ले जाकर पूरी तरह टॉर्चर किया गया जिससे सिकंदर घायल हो गया और उसे महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा इस दौरान पुलिस ने घटना से पल्ला झाड़ते हुए सिकंदर के खिलाफ राज कार्य में बाधा पहुंचाने का मुकदमा दर्ज कर लिया और सिकंदर के घायल होने के कारण उसकी बहन साजिदा द्वारा रिपोर्ट दी गई जो पुलिस ने लेने से इनकार कर दिया जिस पर साजिदा द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में परिवाद पेश किया गया और न्यायालय द्वारा सिकंदर का मेडिकल करवाने के आदेश दिए गए जिस पर सिकंदर का मेडिकल करवाया गया 15 साल मुकदमा चला और जब सिकंदर बरी हुआ तो न्यायालय द्वारा तत्कालीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ साक्ष्य प्रमाणित मानते प्रसंज्ञान लेने के आदेश पारित किए गए 

*क्या था मामला*

 वर्ष 2011 में तत्कालीन ट्रैफिक निरीक्षक दयाराम फालूदा में मय जाब्ता पुलिसकर्मियों सहित कल्पतरु सिनेमा रोड पर नाकाबंदी कर वाहनों की जांच कर चालान बना रहे थे उसे समय सिकंदर व उसके पीछे बैठा व्यक्ति मोटरसाइकिल पर उधर से जा रहे थे जिसे रुकने का इशारा किया और रोकने पर कागज मांगे तो गाली गलौज कर झगड़ा करने लगे और पुलिसकर्मियों को गाली गलौज कर मारपीट की और चोटे पहुंचाई तथा सरकारी वाहन में तोड़फोड़ की वायरलेस तोड़ दिया जिस पर की सी आई दयाराम फाडूदा द्वारा मुकदमा दर्ज करवा राज कार्य में बाधा पहुंचाने वाले सिकंदर को गिरफ्तार किया गया चालान पेश कर मुकदमा चला

 *न्यायालय में पेश किए गए सबूत व तर्क*

 न्यायालय में बहस के दौरान अधिवक्ता जहीर अब्बास द्वारा तर्क पेश किए गए की पुलिस द्वारा ही घटना कारित की गई एवं की पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया गया जिसमें अन्य पुलिसकर्मियों को ही गवाह बनाया गया और अपने अधीनस्थ कर्मचारी द्वारा जांच करवाई गई जो सी आई के आदेश से जांच कर रहे थे और सिकंदर के खिलाफ चालान पेश किया गया और सिकंदर के द्वारा दिए गए मुकदमे में एफ आर पेश की गई इस प्रकार पुलिस द्वारा की गई जांच को निष्पक्ष जांच नहीं माना जा सकता इसमें एक भी निष्पक्ष गवाह नहीं था पुलिस द्वारा जितने भी 11 पुलिसकर्मी गवाह के रूप में और 14 दस्तावेज पेश किए गए फिर भी राज कार्य में बाधा के मुकदमे को साबित करने में असफल रहे जबकि साजिदा द्वारा 13 दस्तावेज सबूत के तोर पे पेश किये गए

 एवं अधिवक्ता जहीर अब्बास द्वारा जिरह करते वक्त सी आई दयाराम फडूदा से सच कबूल करवाया गया कि चालान डायरी उसी के कब्जे में थी एवं चालान बाद में घर पर बनाया गया है जिसमें सिकंदर के ना तो साइन है ना ही नाम है मात्र गाड़ी नंबर के आधार पर सिकंदर पर मुलजिम बनाया गया और उसे दिन नाकाबंदी करने के कोई आदेश भी पुलिस कर्मियों के पास नहीं थे और अन्य पुलिस कर्मियों को बुलाकर गवाह बनाया गया जो की ड्यूटी रजिस्टर में अन्य जगहों पर ड्यूटी कर रहे थे कांस्टेबल इंदर सिंह से जिरह करते हुए अधिवक्ता जहीर अब्बास ने सवाल पूछे तो इंद्र सिंह ने न्यायालय में अपने तितम्बा बयान लेखबद होने से इनकार कर दिया जो बयान डिप्टी एसपी रैंक के अधिकारी द्वारा लिए गए थे इस प्रकार इंद्र सिंह द्वारा न्यायालय के समक्ष झूठे बयान दिए गए इस प्रकार पुलिस के सभी गवाह न्यायालय के समक्ष झूठ साबित हुए और सिकंदर के मेडिकल दस्तावेज से यह साबित हुआ कि सिकंदर को गंभीर चोटे पहुंचाई गई और वह 9 दिन तक अस्पताल में चोटों के कारण जैरे इलाज भर्ती रहा था इस प्रकार दोनों प्रकरण में फैसला सुनाते हुए न्यायालय द्वारा सिकंदर को बरी किया गया और दयाराम फाडूदा कांस्टेबल इंदर सिंह ड्राइवर संपत अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ संज्ञान लेने के आदेश पारित किए गए