बुजुर्गो मांथे की पगड़ी होते हे। आप उनकी इज्जत करेंगे तो आप इज्जत पाएंगे : डॉ रघुराज सिंह कर्मयोगी
अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी स्वर्ण कलश सम्मान-2025 से सम्मानित
बुजुर्गो मांथे की पगड़ी होते हे। आप उनकी इज्जत करेंगे तो आप इज्जत पाएंगे : डॉ रघुराज सिंह कर्मयोगी
रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही

कोटा । राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय, कोटा में "अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस" बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध वरिष्ठ उपन्यासकार डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी को उनके साहित्यिक योगदान, जीवन के अनुभव और समाज को दी गई अमूल्य प्रेरणाओं के लिए “स्वर्ण कलश सम्मान-2025” प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार के.सी.राजपूत , मुख्य अतिथि डॉ रघुराज सिंह कर्मयोगी, विशिष्ट अतिथि बिगुल कुमार जैन रहे | मंच संचालन डॉ शशि जैन ने किया |
कार्यक्रम में वरिष्ठजनों की जीवन यात्रा और अनुभवों को संरक्षित करने तथा युवाओं को मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से “विज़डम वॉल” का शुभारंभ भी किया गया। यह वॉल भविष्य में पुस्तकालय आने वाले पाठकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। मण्डल पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा —

“वरिष्ठजन हमारे समाज की धरोहर हैं। उनके अनुभव और ज्ञान किसी भी पुस्तक से कम नहीं। राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय कोटा द्वारा ‘स्वर्ण कलश सम्मान’ इसी भाव के साथ प्रारंभ किया है। जिससे युवाओं को अपने बुजुर्गों से सीखने और उनकी जीवन यात्रा को समझने का अवसर मिले।” सम्मानित उपन्यासकार डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी ने भावुक होकर अपने विचार व्यक्त किए—
“यह मेरे लिए अत्यंत गर्व और भावुकता का क्षण है कि मुझे ‘स्वर्ण कलश सम्मान’ से नवाज़ा गया। एक लेखक और वरिष्ठजन के नाते मेरी यही कोशिश रही है कि अपने लेखन और अनुभवों के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रेरित कर सकूँ। पुस्तकालय द्वारा किया गया यह प्रयास सराहनीय है। आने वाले समय में समाज में पीढ़ियों के बीच यह एक सेतु का कार्य करेगा।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक, साहित्यकार, पाठकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने वरिष्ठजनों के योगदान को याद करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और पुस्तकालय की इस अनूठी पहल की सराहना की।