भगवान परशुरामजी का जन्मोत्सव श्रद्धा ओर उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

भगवान परशुरामजी का जन्मोत्सव श्रद्धा ओर उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

भगवान परशुरामजी का जन्मोत्सव श्रद्धा ओर उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

 भगवान परशुराम महादेवकी विधिविधान के साथ पूजा अर्चना व महाआरती होगी

21किलो का पुष्प हार व लापसी का भोग लगेगा

भगवान परशुराम महादेव गुफा के चारों तरफ परिक्रमा लगेगी व ध्वजा चढ़ाई जाएगी

पाली । विश्व की प्राचीन अरावली पर्वत श्रृंखलाओं के शीर्ष पर व पाली व राजसमंद जिले की सीमा पर स्थित चिरंजीव भगवान परशुराम महादेव की एकमात्र तपोस्थली परशुराम महादेव गुफस्थल पर भगवान परशुरामजी का जन्मोत्सव श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। परशुराम महादेव ट्रस्ट के अध्यक्ष गणेश सिंह परमार व व्यवस्थापक अंबालाल गुर्जर के अनुसार इस दौरान महादेव की गुफा के चारों तरफ परशु संग परिक्रमा लगेगी व निज गुफा मंदिर पर ध्वजा भी चढ़ाई जाएगी।

अक्षय तृतीया को भगवान परशुराम महादेव का जन्म दिन है इस पवन पर्व पर परशुराम महादेव के प्रमुख पुजारी हरिहर पूरी व जितेंद्र पूरी गोस्वामी सर्व प्रथम भगवान परशुराम महादेव के निज मंदिर में स्थित स्वयंभू व प्राकृतिक शिव लिंग का जलाभिषेक दुग्धाभिषेक व बाद में गंगाजल व गुलाब जल से जलाभिषेक कर शिवलिंग की घी से मालिश व शिवलिंग पर केशर मोली अक्षत मंत्रोच्चार से बेलपत्र अर्पित करके श्वेतांबर व पीतांबर वस्त्र धारण करवाएंगे। परशुराम महादेव व माता पार्वतीजी का विशेष शृंगार कर उन्हें सोने व चांदी के जेवरात धारण करवाएंगे। पूजा अर्चना के बाद भगवान परशुराम महादेव की तस्वीर परशु संग श्रद्धालुओं संग मादल की थाप पर शिरकते श्रद्धालु ध्वजा संग पैदल गुफस्थल से परिक्रमा की शुरुआत करेंगे। व्यवस्थापक अंबालाल गुर्जर व पुजारी जितेंद्र पूरी गोस्वामी के साथ श्रद्धालु पार्वती घाटी भील भीलनी की टेकरी व निज मंदिर पर ध्वजा चढ़ाने के बाद परिक्रमा पुन निज मंदिर पर पहुंचेगी। 

भगवान परशुराम महादेव के स्वयं भू शिवलिंग को स्पेशल अर्धनारीश्वर साफा पहनाकर 21 किलो पुष्प का हार धारण करवाएंगे। भगवान परशुराम महादेव के स्वयं भू शिवलिंग का गुलाब के फूले से शानदार श्रृंगार किया जाएगा व प्रमुख पुजारी हरिहर पूरी गोस्वामी एक पर पर खड़े एक कर चिरंजीव भगवान परशुराम महादेव की महाआरती करेंगे। महाआरती के बाद ड्रायफ्रूट्स से बनी लापसी का भोग लगाएंगे व श्रद्धालुओं में लापसी का प्रसाद वितरित करेंगे। अक्षय तृतीया को भगवान परशुरामजी का जन्म हुआ था इनके जन्म दिन के बाद ही केदारनाथबद्री विशाल गंगोत्री व जमनोत्री के पट खुलते हैं। चिरंजीव भगवान परशुरामजी का जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था व भगवान परशुरामजी एक मात्र तपोस्थली परशुराम महादेव है जो भी भक्त अक्षय तृतीया को भगवान परशुरामजी के दर्शन करता है महादेव इस दिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करते हैं।अक्षय तृतीया के दिन दिनभर भगवान परशुराम महादेव निज मंदिर में रुद्राभिषेक का कर्म चलता रहेगा।