हजारों महिलाएं कलश धारण कर चली शोभायात्रा में

हजारों महिलाएं कलश धारण कर चली शोभायात्रा में

जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी जी की निश्रा में पाली में निकली ऐतिहासिक शोभायात्रा

– हजारों महिलाएं कलश धारण कर चली

– पौराणिक झांकियां, हाथी अश्व रथ पालकियों ने धर्ममय किया माहौल

पाली। नगर में पहली बार ऐसी भव्यातिभव्य शोभायात्रा निकाली गई जो पाली अंचल ने कभी नहीं देखी थी। कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज के पावन सानिध्य में निकली शोभायात्रा ने भीड़ के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई। जगद्गुरू देव की निश्रा में अणुव्रत नगर ग्राउंड पर आयोजित 9 दिवसीय साधना लक्ष्मी महायज्ञ और भैरव पुराण कथा के समापन दिवस रविवार को कलश यात्रा भव्य स्वरूप में निकली। 

दोपहर लगभग 12 बजे कलश यात्रा बालिया स्कूल के पास रामदेव मंदिर से प्रारंभ हुई। शोभायात्रा करीब 4 किमी से अधिक लंबी थी। यात्रा आरंभ स्थल को विशाल रंगोली से सजाया गया था। 

*गुरूदेव ने दिया पालिवासियों को आशीर्वाद–*

शोभायात्रा में जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज स्वयं पदयात्रा करते चल रहे थे। मार्ग में कई स्थानों पर विभिन्न सामाजिक धार्मिक व्यापारिक संगठनों द्वारा गुरूदेव और शोभायात्रा में शामिल भक्तों का भावभीना स्वागत किया। जगद्गुरू देव वसंत विजयानंद गिरी जनमानस को आशीर्वाद देते चल रहे थे। इस दौरान पाली का समूचा बाजार और गलियां गुरुदेव के जयकारों से गूंज उठे। 

मार्ग में 50 से अधिक स्थानों पर विभिन्न संगठनों द्वारा शोभा यात्रियों के लिए जल मिठाई ज्यूस टॉफी आदि के स्टाल लगाकर सेवा की गई।

*डीजे ढोल की थाप पर खूब झूमे भक्त–*

शोभायात्रा में सबसे आगे डीजे इसके बाद हाथी नौ अश्व कलश धारण किये महिलाओं की कतार बीजापुर बैंड बग्गियों में विराजित भक्तगण कच्ची घोड़ी फिर कलश धारी महिलाएं और पुरूष भारी संख्या में चल रहे थे। पंजाब के बैंड नासिक के ढोल और डीजे पर भक्तगण झूमते नृत्य करते चल रहे थे। पौराणिक झांकियों ने सनातन शक्ति और परंपरा के प्रसंग बयां किये। 

*इन मार्गों पर न मिली पैर रखने की जगह–*

रामदेव मंदिर से प्रारंभ शोभायात्रा मेड़तिया स्वीट्स महाराणा प्रताप चौक सराफा बाजार घी का झंडा धानमंडी रुई कटला पुरानी सब्जी मंडी, सुराणा सराय पुराना बस स्टैंड होते हुए महोत्सव स्थल अणुव्रत नगर ग्राउंड पर सभा मे परिवर्तित हुई। इन मार्गों से जब शोभायात्रा गुजरी तो पैर रखने की भी जगह नहीं थी। गलियां गुरूदेव के भक्तों से खचाखच भरी थी। 

यात्रा के बाद कृष्णगिरी पीठाधीश्वर वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने भारी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित किया। पुरुष जो अपने साथ हरे कपड़े में इलायचियां लेकर आये थे उन्हें मंत्रोच्चार के साथ सिद्ध करवाया गया वहीं जो महिलाएं जल कलश लेकर आई उनके कलश और जल तथा उसमें रखी सामग्री भी विशिष्ट विधि और मंत्रोच्चार से सिद्ध करवाई गई। जगद्गुरू देव ने बताया कलश का जल घर को सदैव सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रखेगा। और अभिमंत्रित इलायची सतत समृद्धि बढ़ाएगी। 

शाम को महालक्ष्मी महायज्ञ की विधि विधान से पूर्णाहुति हुई। 

*गुरू और शिष्य का संबंध पतंग और डोर जैसा–*

शनिवार रात्रि कथा प्रवचन में जगद्गुरू देव वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने कहा कि गुरू और शिष्य का संबंध पतंग और डोर जैसा है। भक्त भटके तो भगवान उसे संभाल लेते हैं। वैसे ही शिष्य को गुरू हमेशा ही सही राह दिखाते हैं। इस महा महोत्सव में जगद्गुरू देव से दीक्षा लेने वाले भक्तों से गुरूदेव ने कहा कि वे झूठ कभी न बोलें। सदैव सकारात्मकता के साथ जीवन जियें। असली चमत्कार उसके जीवन मे होता है जो ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास रखे। इस विश्वास से अपना जीवन अलौकिक करें। संतों का सदैव सम्मान करें। ईश्वर के घर मे बैठे हैं तो अनर्गल बातों को सोचने की बजाय ईश्वर को प्राथमिकता दें। सरल रहोगे तो सुखी रहोगे।