एम्स जोधपुर में गुर्दे के ऑपरेशन में मिली सफलता
एम्स जोधपुर में गुर्दे के ऑपरेशन में मिली सफलता
साहस और चिकित्सकीय दृढ़ता की मिसाल पेश करती 37 वर्षीय महिला ने एम्स जोधपुर में एक दुर्लभ अनुवांशिक रोग से जूझते हुए जीवन में असाधारण ताकत दिखाई है जो उनके परिवार के कई सदस्यों को प्रभावित करता है।
24 वर्ष की आयु में निदान होने के बाद यह महिला एक जटिल पारिवारिक सिंड्रोम के साथ जीवन जी रही है जो कई अंगों को प्रभावित करता है खासकर दोनों गुर्दों को। इससे पूर्व उनकी आंख और मस्तिष्क से संबंधित सर्जरी भी हो चुकी है। इन भारी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहते हुए नियमित चिकित्सकीय परामर्श और जांच का कड़ाई से पालन किया।
इस बीमारी के कारण उनके दोनों गुर्दों में कई ट्यूमर विकसित हो गए। तीन साल पहले, उनके दाहिने गुर्दे की सर्जरी हुई थी तथा 9 गांठें निकाली गई थीं। हाल ही में एम्स जोधपुर में उनके बाएं गुर्दे के ट्यूमर के लिए एक और सफल सर्जरी की गई जिसमें 8 गांठें सफलतापूर्वक निकाली गई हैं।
उनका उपचार करने वाले यूरोलॉजिस्ट डॉ. गौतम राम चौधरी अतिरिक्त आचार्य यूरोलॉजी विभाग एम्स जोधपुर के अनुसार यह रोग एक दुर्लभ अनुवांशिक सिंड्रोम का हिस्सा है जिसमें लगातार निगरानी की आवश्यकता होती है। “ऐसे मरीजों को नियमित जांच की जरूरत होती है ताकि समय पर हस्तक्षेप किया जा सके” उन्होंने कहा।
डॉ. चौधरी ने आगे बताया कि इस स्थिति से जुड़े गुर्दे के ट्यूमर के दोबारा विकसित होने की संभावना अधिक होती है। “छोटे ट्यूमर केवल निगरानी में रखे जाते हैं, लेकिन जब वे 3 सेमी से बड़े हो जाते हैं तो सर्जरी आवश्यक हो जाती है। मुख्य चुनौती यह होती है कि सभी दिखाई देने वाले ट्यूमर हटाए जाएं और अधिक से अधिक स्वस्थ गुर्दा ऊतक को सुरक्षित रखा जाए। रोबोटिक सर्जरी को वरीयता दी जाती है क्योंकि यह सटीक होती है रक्तस्राव कम होता है और बड़े निशान से बचाती है”।
एम्स जोधपुर के यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. ए. एस. संधू ने इस तरह के रोगियों के लिए समग्र देखभाल के महत्व पर जोर दिया। इसी जरूरत को देखते हुए विभाग ने “फैमिलियल और सिंड्रोमिक जनिटो-यूरिनरी कैंसर क्लिनिक” की स्थापना की है।
“यह क्लिनिक कई विशेषज्ञताओं को एक ही स्थान पर लाता है” डॉ. संधू ने कहा। “यह एकीकृत देखभाल उन्नत निदान और परामर्श प्रदान करता है। जब भी जरूरत पड़ती है बहुविभागीय बैठकें आयोजित की जाती हैं ताकि मरीजों को कई बार अस्पताल आने की परेशानी न उठानी पड़े”।
सर्जरी टीम के अन्य सदस्यों में डॉ. महेंद्र सिंह (अतिरिक्त आचार्य) डॉ. शिवचरण नावरिया (अतिरिक्त आचार्य) तथा डॉ. दीपक प्रकाश (सह आचार्य) शामिल थे।
इस महिला की यात्रा समय पर निदान नियमित निगरानी और समन्वित चिकित्सकीय देखभाल की शक्ति की जीवंत मिसाल है। उनका संकल्प उन सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनता है जो इसी तरह की जटिल चिकित्सा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।