जीया जूण नै पळोटती कहाणियां : आस निरास समीक्षक अब्दुल समद राही

जीया जूण नै पळोटती कहाणियां : आस निरास समीक्षक अब्दुल समद राही

समीक्षा-

            जीया जूण नै पळोटती कहाणियां : आस निरास 

        कहाणियां फगत पढ'र मनोरंजन खातर इज नीं व्है बल्कै कहाणियां आपां नै इमानदारी, दया साहस रै सागै जीवण रौ अनभौ, एक दूजा खातर सहानुभूति, समस्या सूं लड़णै री सीख ई देवै। कहाणियां मनोरंजन रै सागै चरित्र निर्माण ई करै अर आं सब सूं बढ़णै आपां नै एक चरित्तरवान मिनख बणण में मदद करै। इस्यी कहानियां जिणा सूं आपां नै जीवण री चुनौतियां रौ सामनौ करण री प्रेरणा मिळै।

      कहाणीकार माधव नागदा ई इणीज भांत कहाणियां रै माध्यम सूं मिनखां नै जीवण रौ सुमारग दिखावतां थकां मनोरजंन ई नीं करै बल्कै चरित्र निर्माण सागै ज्ञानवर्धन ई करै।

       माधव नागदा राजस्थानी रा चावा-ठावा साहित्यकार है। कहाणीकार माधव नागदा जी रौ नाम राजस्थानी साहित जगत में घणै आदर अर,मान सागै लियौ जावै। 

राजस्थानी कहाणी संग्रै 'उजास रै पछै' माधव नागदा जी रौ दूजौ कहाणी संग्रै 'आस निरास' पढ़ण नै मिल्यौ।

      इण संग्रै मांय पन्द्रै कहाणियां है, जकी आपांरै आळै-दोळै, जीया जूण नै पळोटती कहाणियां है । आं कहाणियां में लेखक आपरी सक्रियता, मनोविज्ञान अर चैतन्य सूझ सूं समाज में फैलयोड़ी अबखायां, नारी रौ दुख-दरद, भूख, संताप नै उजागर करण रौ सांगोपांग जाझौ जतन करियौ है। 

इण इज भांत मिनख रौ मिनखपणौ, नारी रौ उत्थान, गरीबी, भूख, संताप अर समस्यावां रौ हल करण रौ मार्मिक दरसाव संग्रै में सफल होवतां निगै आवै।

        शीर्षक कहाणी आस निरास एक मार्मिक कहाणी है जकी एक गरीब परिवार री व्यथा सूं रूबरू करावै। 'भूख री खातर चोरी करणियौ टाबर चोर कोनी हुवै, गरीबी बणा दियौ है'। ऐ बोल मिनख नै झकझोर देवै। 

         कहाणीकार री भासा शैली दमदार, नै संवाद जानदार हैं जका पढेसरां रै हियै गै'राई सूं ढूकै अर वांरी मनगत माथै सीधौ असर करै के वो इणनै लगोलग पढ़तौ ई जावै। 

पोथी री छपाई अर कवर ई फूटरौ है। कहाणीकार माधव नागदा नै इण मनमोवणां कहाणी संग्रै रै रचाव खातर हियैतणी बधाई अर लखदाद।

      उम्मीद करां नागदा जी रौ नुवौ रचाव बेगौ ई आपां रै साम्हीं आवैला अर राजस्थानी भासा राती माती हुवैला।

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पोथी : आस निरास 

लेखक : माधव नागदा 

समीक्षक : अब्दुल समद राही 

संस्करण : 2025

विधा : कहाणी 

मोल : 695.00 रुपया 

पाना : 128

प्रकाशक : सुरेश बुक सर्विस, उदयपुर