आहोर में तहसीलदार के किया करोड़ो की बक्शिश भूमि का नामांतरण
आहोर में तहसीलदार के किया नामांतरण जालौर / जिले के आहोर क्षेत्र में ग्राम पंचायत को बख्शीश की गई जमीन को न्यायालय के आदेश के बाद बिना राज्य सरकार की अनुमति व सलाह लिए तहसीलदार ने नामांतरण कर दी है। ऐसे मामले में राज्य सरकार की जमीन का नामांतरण करने से पूर्व कलेक्टर की अनुमति आवश्यक है और इसके लिए न्यायालय के आदेश पर पुनः अपील करने का रास्ता भी अपनाया जाता है।
आहोर तहसील के खसरा नंबर 1008 और 1009 की जमीन जोधपुर रोड पर आई हुई है। यह जमीन कई वर्ष पहले जमीन मालिक ने इसे ग्राम पंचायत आहोर को रजिस्टर्ड बख्शीश की। उसके बाद इस जमीन पर ग्राम पंचायत की संपत्ति का बोर्ड भी लगाया गया था। वर्ष 2017 में बख्शीश करने वाले व्यक्ति के वारिस ने उच्च न्यायालय में बख्शीश को रद्द करने का दावा किया था लेकिन आहोर ग्राम पंचायत को नगर पालिका में क्रमोन्नत करने के बाद पालिका की ओर से पैरवी नहीं की गई।
ग्राम पंचायत से नगर पालिका में क्रमोन्नत होने के बाद सरकारी जमीनें नगर पालिका को हस्तांतरित हो गई थी। ऐसे में नगर पालिका ओर से इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन तहसीलदार ने 28 अक्टूबर को जिला कलेक्टर को एक पत्र लिख न्यायालय में मजबूत पैरवी की मांग की गई। 3 नवंबर को न्यायालय ने ग्राम पंचायत के विरुद्ध आदेश जारी कर खातेदारों को जमीन सौंपने का निर्णय दिया। तहसीलदार लदाराम पंवार ने बताया कि सभी आरोप गलत है। न्यायालय के आदेशानुसार जो जमीन पंचायत के कब्जे में उसे पंचायत को दी जाए और बाकी खातेदार को लौटा दी जाए। जिस पर पंचायत की सब्जी मंडी चल रही उसे पंचायत के नाम किया। बाकी खातेदार को लौटा दी। जिसके अनुसार उन्होंने अपना काम किया है।
रिटायर्ड डिप्टी रजिस्ट्रार ओटाराम मीणा ने बताया कि न्यायालय के आदेश के बाद राज्य सरकार की जमीन पर म्यूटेशन भरने से पूर्व तहसीलदार की ओर से कलेक्टर व सरकार से अनुमति मांगी जाती है। कलेक्टर की ओर से ऐसे मामलों में राज्य सरकार से सलाह लेकर न्यायालय में पुनः अपील की जाती है। ताकि सरकारी जमीन को बचाया जा सके। ऐसा नहीं होने पर तहसीलदार के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती हैं। और फिर से डबल बेंच में अपील कर स्टे लिया जा सकता हैं।न्यायालय के आदेश के बाद वर्तमान तहसीलदार पंवार ने बिना कलेक्टर की अनुमति लिए 10 नवंबर को ही रात में ही खसरा नंबर 1008 और 1009 का म्यूटेशन भर दिया। तहसीलदार पंवार ने बताया में बताया कि उन्होंने न्यायालय के आदेशों की पालना में म्यूटेशन भरा है जबकि नियमानुसार ऐसा करने से पूर्व कलेक्टर की अनुमति आवश्यक है।
यह जमीन आहोर के जोधपुर रोड पर आई हुई है। दोनों खसरों की जमीन मिलाकर 16.75 बीघा जमीन है। वर्तमान में इस जमीन की कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है। मुख्य रोड पर होने के कारण भूमाफियाओं की इस पर नजर है। इसलिए जब पैरवी कमजोर होती देख तत्कालीन तहसीलदार ने 28 अक्टूबर को कलेक्टर को पत्र लिखा तो राजनीतिक तबादला कर दिया गया। नए तहसीलदार लदाराम पंवार ने आदेश आते ही आंख बंद कर म्यूटेशन भर दिया।