भील समाज की बेटी दिव्या को घोड़े बैठाकर निकाली बंदोली

भील समाज की बेटी दिव्या को घोड़े बैठाकर निकाली बंदोली

भील समाज की बेटी दिव्या को घोड़े बैठाकर निकाली बंदोली  

जनजातीय गौरव दिवस पर विश्व हिन्दू परिषद की पहल पर सामाजिक समरसता सनातन एकता संस्कृति रक्षण और महिला सम्मान का सशक्त संदेश।

जनजाति गौरव दिवस के पावन अवसर पर विश्वहिन्दू परिषद जोधपुर द्वारा सामाजिक समरसता, महिला सम्मान व सनातन एकता संस्कृति के रक्षण की अद्भुत पहल की गई।

जोधपुर पाल रोड निवासी भील समाज के रामचन्द्र की बेटी दिव्या का विवाह समारोह है इस अवसर पर प्रान्त व महानगर पदाधिकारियों ने प्रान्त संगठन मंत्री राजेश पटेल के सानिध्य में विवाह समारोह में सहभागिता की तथा दुल्हन दिव्या बहन की बन्दोली पाल बालाजी मंदिर से घोड़ी पर बैठाकर निकाली इस पहल ने समाज में एक अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की क्योकि यह केवल परंपराओं का उत्सव नहीं था बल्कि सामाजिक समरसता सांस्कृतिक गौरव महिला सम्मान और जनजातीय अस्मिता का सशक्त संदेश भी लेकर आया।

जनजाति समुदाय की महान शौर्य संस्कृति परंपरा और स्वतंत्रता के प्रतीक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वी जयंति पर हुए इस समारोह से यह सन्देश निकला कि परंपराएं प्रगतिशील विचारधारा से जुड़ती हैं तो समाज में परिवर्तन और प्रेरणा दोनों का प्रवाह होता है।

पाल बालाजी मंदिर में पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात ढोल-नगाड़ों की ताल पर महिलाओं द्वारा मंगल गीतों के साथ दिव्या बहन की बंदोली निकाली गई। प्रान्त संगठन मंत्री राजेश पटेल व विहिप प्रांत सहमंत्री महेन्द्र उपाध्याय ने स्वयं बहन को घोड़ी पर बैठाया तथा लगाम थामी।बन्दोली में विश्व हिंदू परिषद जोधपुर के प्रांत सह मंत्री महेन्द्र उपाध्याय डॉ. खेमराज वर्मादौलत सिंह अधिवक्ता निशा राठौड़ डॉ. जया वर्मा भगवती मनिषा केला आरती राखेचा सहित दुल्हन पक्ष के परिजन व अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

सभी ने एक स्वाभिमानी, संगठित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हिन्दू समाज निर्माण का संदेश दिया।भगवान बिरसा मुंडा के जीवन संदेश से प्रेरित यह भाव जनजाति गौरव संस्कार परंपरा और संस्कृति के सम्मान के साथ-साथ सुदृढ सशक्त, समरसता युक्त सामाजिक सद्भाव के निर्माण में महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा।साथ ही महिला शक्ति सम्मान और समानता की वास्तविक अभिव्यक्ति और सामूहिक उत्तरदायित्व का संदेश भी प्रसारित होगा।जनजातीय गौरव दिवस पर विश्व हिन्दू परिषद की यह पहल सर्व हिन्दू समाज के लिए प्रेरक अनुकरणीय बनेगी तथा जागरूकता बढ़ेगी और सर्वत्र यह सन्देश जाएगा कि हिन्दू समाज में हमेशा से बेटी सम्मानित है, इसी कारण अनादिकाल से समाज श्रेष्ठ और संस्कृति सुरक्षित है।