भारत की रक्षा प्रणाली में भैरवदेव की भूमिका

भारत की रक्षा प्रणाली में भैरवदेव की भूमिका

जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने कहा -भारत की रक्षा प्रणाली में भैरवदेव की भूमिका

– जगद्गुरूदेव की निश्रा में सिद्ध हुआ रोग निवारक तेल

 *पाली।* अणुव्रत नगर के विशाल प्रांगण में कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज के सानिध्य में आध्यात्मिक महामहोत्सव में हर दिन भीड़ का रिकॉर्ड टूट रहा है। सुबह की साधना, दोपहर में समृद्धि दाता महालक्ष्मी महायज्ञ और रात्रि भैरव पुराण महाकथा में श्रद्धालुओं का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। 

मंगलवार को भैरव महाकथा की शुरुआत जगद गुरु वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने श्रद्धालुओं को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देकर की। आपने कहा कि यह अत्यंत गौरव का विषय है कि अब भारत की सरकार ने भी सनातन की सिद्ध परंपरा और पौराणिक महत्व को अंगीकार किया है। देश की रक्षा प्रणाली में सर्वशक्तिमान भैरव देव की शक्ति को स्वीकार किया गया है। भारत की सेना में एक विशेष बटालियन खड़ी की गई है जिसका नाम भैरव बटालियन रखा गया है। इसमें विपरित परिस्थितियों में धैर्य के साथ रक्षा करने के साथ ही दुश्मन को समूल नष्ट करने में विशेष दक्षता प्राप्त कमांडो तैनात किए गए हैं। ऐसी 25 भैरव बटालियन तैयार की जा रही है जो दुर्गम क्षेत्रों में भारत की आंतरिक और सीमा की रक्षा में सर्वस्व न्योछावर करने को तत्पर रहेगी। भैरव बटालियन का निशान और ध्येय वाक्य भी पौराणिक स्वरूप में है। शिव के उग्र रूप भैरव यानि भयरहित होकर शत्रुओं का संहार करने वाले हैं। ऐसे भैरव की हम यहां आराधना कर रहे हैं। 

गुरूदेव ने कथा में सनन्दन मुनि द्वारा भगवान नरसिंह की जंगल में तपस्या, भोले शिकारी को नरसिंह दर्शन का प्रसंग बताया और कहा कि भगवान हमेशा भोले को ही दर्शन देते हैं। धन से दरिद्र होना समझ आता है लेकिन मन से दरिद्र नहीं होना चाहिए। आभामण्डल ठीक करने के लिए हमेशा सकारात्मक और सही सोच रखें। इससे समृद्धि बढ़ती है। नकारात्मकता से आप धन भले ही पा लें लेकिन वह खर्च गलत स्थान पर ही होगा। खुशी से खर्च करने पर आभामण्डल बेहतर बनाया जा सकता है।

*कथा पांडाल में ही सैकड़ों पीड़ितों का दर्द गायब-*

कथा के दौरान गुरुदेव ने पूर्व उद्घोषणा अनुसार श्रद्धालुओं से 50 मिली सरसों तेल मंगवाया था। गुरुदेव ने सभी से हाथ ऊपर कर तेल की शीशियां दिखाने को कहा गुप्त मंत्र से सिद्ध किया। फिर सभी से कहा जो पांडाल में बैठे हैं उन्हें शरीर में कहीं भी बरसों पुराना दर्द है उस स्थान पर इस सिद्ध तेल को अत्यधिक कम मात्रा में लगाएं और अपने अपने अनुभव अभी बतायें। इसके बाद तो मानों श्रद्धालुओं में ठीक हुए दर्द को बताने की होड़ मच गई। एक एक कर सैकड़ों महिला पुरुष खड़े होते गए और ओपन माइक पर अनुभव साझा किए। 

*हजारों श्रद्धालुओं ने दिया अपशब्द न बोलने का वचन-*

श्रद्धालुओं से गुरुदेव ने कहा पाली में अपशब्द बोलने का अत्यधिक चलन है। इससे खुद के जीवन मे ही नहीं बल्कि परिवार समाज और नगर के वातावरण में नकारात्मकता आती है। यह सुख शांति और समृद्धि को प्रभावित करने वाला बड़ा कारक है। पाली क्षेत्र को खुशहाल समृद्ध बनाना है तो भाषा से अपशब्दों को हमेशा के लिए तिलांजलि देना होगी। गुरुदेव ने आव्हान किया कि कौन लोग अपशब्द बोलना सदैव के लिए छोड़कर स्वकल्याण चाहते हैं। तब हजारों की तादाद में उपस्थित श्रद्धालुओं ने हाथ खड़े कर कभी अपशब्द न बोलने का गुरूदेव की साक्षी में संकल्प लिया। इस दौरान कथा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। 

*बुधवार को सिद्ध होगा कष्ट निवारण डोरा-*

बुधवार को सभी श्रद्धालुओं के लिए सर्व कष्ट निवारक डोरा तैयार करवाया जाएगा। इसके लिए श्रद्धालुओं को 1 मीटर लाल डोरा लाना होगा। पांडाल में गुरूदेव द्वारा भैरव रक्षा कवच और सर्व कार्य सिद्धि के लिए अभिष्ट मंत्रोच्चार से डोरे सिद्ध करवाये जाएंगे। जिसमें मंत्रोच्चार के साथ 27 गांठें लगवाई जाएगी।