पूर्व उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने किया युवा लेखक अरमान नदीम की पुस्तक ‘आईने के अरमान’ का लोकार्पण

पूर्व उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने किया युवा लेखक अरमान नदीम की पुस्तक ‘आईने के अरमान’ का लोकार्पण

पूर्व उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने किया युवा लेखक अरमान नदीम की पुस्तक ‘आईने के अरमान’ का लोकार्पण

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

नई दिल्ली। भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति, वरिष्ठ राजनयिक, शिक्षाविद् एवं प्रख्यात चिंतक डॉ. मोहम्मद हामिद अंसारी ने युवा लेखक अरमान नदीम की नवीनतम नॉन फिक्शन कृति ‘आईने के अरमान’ का लोकार्पण किया। नई दिल्ली में आयोजित एक आत्मीय एवं गरिमामय भेंट के दौरान संपन्न हुए इस अवसर पर साहित्य, संस्कृति, इतिहास, शिक्षा तथा समकालीन सामाजिक विषयों पर विस्तृत विचार विमर्श भी हुआ।

अरमान नदीम ने डॉ. अंसारी को अपनी पुस्तक भेंट करते हुए इसके लेखन की प्रेरणा, उद्देश्य और विषयवस्तु के बारे में जानकारी दी। डॉ. अंसारी ने पुस्तक का अवलोकन करते हुए युवा पीढ़ी में साहित्यिक चेतना और अध्ययन संस्कृति के विकास को समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने, संवाद को सशक्त बनाने तथा मानवीय मूल्यों को संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

कार्यक्रम में दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से सहभागी रहे एक प्रतिष्ठित क्रांतिकारी परिवार के वंशज मूसा मुनीर ख़ान की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने अरमान नदीम का परिचय डॉ. हामिद अंसारी से कराया तथा पुस्तक और उससे जुड़े साहित्यिक विमर्श में सहभागिता निभाई।

विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि औपचारिक रूप से इस भेंट के लिए लगभग पंद्रह मिनट का समय निर्धारित था, किंतु डॉ. हामिद अंसारी ने अरमान नदीम और मूसा मुनीर ख़ान के साथ लगभग एक घंटे तक साहित्य, संस्कृति, इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों, शिक्षा और समकालीन सामाजिक विषयों पर गंभीर एवं सार्थक विचार विमर्श किया। इस दौरान उन्होंने अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन, कूटनीतिक अनुभवों तथा भारत की बहुलतावादी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विचार साझा किए। युवा पीढ़ी के बौद्धिक विकास और रचनात्मक लेखन के प्रति उनकी गहरी रुचि और आत्मीयता इस संवाद के दौरान स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

अरमान नदीम ने कहा कि डॉ. हामिद अंसारी जैसे विद्वान व्यक्तित्व द्वारा उनकी पुस्तक का लोकार्पण होना उनके साहित्यिक जीवन का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पड़ाव है। उन्होंने बताया कि ‘आईने के अरमान’ एक चिंतनपरक कृति है, जिसमें समाज, मानवीय संबंधों, समकालीन चुनौतियों, युवा चेतना और जीवन मूल्यों से जुड़े विविध विषयों पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं। पुस्तक का उद्देश्य पाठकों को सकारात्मक चिंतन, संवाद और सामाजिक संवेदनशीलता की ओर प्रेरित करना है।

कम आयु में ही साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बना चुके अरमान नदीम की पूर्व प्रकाशित कृतियों को भी पाठकों और साहित्यिक जगत से सराहना प्राप्त हुई है। साहित्य, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर उनकी सक्रिय भागीदारी उन्हें युवा पीढ़ी के उभरते हुए रचनाकारों में विशिष्ट स्थान प्रदान करती है।

यह अवसर केवल एक पुस्तक लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साहित्य, इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय जीवन से जुड़े विषयों पर एक गंभीर बौद्धिक संवाद के रूप में भी स्मरणीय बन गया। 

अरमान नदीम की इस उल्लेखनीय साहित्यिक उपलब्धि पर साहित्य, कला और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने हर्ष व्यक्त किया है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पूनम माटिया, रंगकर्मी विजय कुमार शर्मा, साहित्यकार संजय श्रीमाली, मकसूद हसन कादरी, इमरोज़ नदीम, अज़ीम हुसैन, अब्दुल रऊफ राठौड़, आयुष कृष्णा त्रिपाठी, अनीसुद्दीन सिद्दीकी अज़ीजुल्लाह शीरानी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद हामिद अंसारी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व द्वारा युवा लेखक अरमान नदीम की पुस्तक ‘आईने के अरमान’ का लोकार्पण न केवल उनकी साहित्यिक साधना का सम्मान है, बल्कि युवा रचनाशीलता को मिलने वाली राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण मान्यता भी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अरमान नदीम भविष्य में भी साहित्य के क्षेत्र में अपनी सृजनात्मक यात्रा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएंगे।