साहित्य और अध्यात्म का हुआ संगम
*साहित्य और अध्यात्म का हुआ संगम*
वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही
नागौर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा मनाए जा रहे गुरु पूर्णिमा उत्सवों की श्रृंखला में शुक्रवार को नागौर जिला इकाई द्वारा हनुमंत धाम, वेद शक्ति पीठ, फागली में गुरु पूर्णिमा समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा गुरु पूजन, सत्यपाल सांदू की गुरुवंदना तथा वर्षा स्वामी की परिषद् गीत प्रस्तुति के साथ हुआ।
मुख्य वक्ता हनुमंत धाम के महंत लक्ष्मीनारायण दास ने महर्षि वेदव्यास के साहित्य एवं जीवन पर प्रकाश डालते हुए भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन को सही दिशा देने वाला मार्ग है तथा देश, काल और परिस्थितियों के अनुरूप उसकी व्याख्या भी परिवर्तित होती रहती है।
परिषद् की नागौर इकाई के संरक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार पवन पहाड़िया ने कहा कि गुरु व्यक्ति को भटकने से बचाकर जीवन का पथ प्रशस्त करता है। उन्होंने अपने साहित्य गुरु लक्ष्मणदान कविया का जिक्र करते हुए बताया कि उनके मार्गदर्शन से आज भी नियमित साहित्य-साधना की प्रेरणा मिलती है।
जिला अध्यक्ष डॉ. मंजू सारस्वत ने गुरु पूर्णिमा का महत्व बताते हुए कहा कि चुनौतियाँ प्रत्येक युग में रही हैं, लेकिन सकारात्मक सोच और सही दिशा में किए गए प्रयास हर समस्या का समाधान प्रस्तुत करते हैं।
विभाग संयोजक सत्यपाल सांदू ने 'मरुधर म्हारो देश' एवं 'आजादी रा रुखवाळा' कविताओं का पाठ कर वातावरण को काव्यमय बना दिया। युवा साहित्यकार गजराज कंवर ने अपनी रचना 'मुझे साधना है स्वयं को' के माध्यम से आत्मानुशासन का संदेश दिया। शिक्षाविद् पुष्पलता व्यास ने गुरुजनों का स्मरण करते हुए वर्तमान समय में गुरु के प्रति घटते सम्मान पर चिंता व्यक्त की। मंच संचालन महामंत्री गिरिराज व्यास ने किया।
कार्यक्रम में सेवाभारती की प्रांतीय कार्यकारिणी के नटवरलाल, एडवोकेट यज्ञदत्त सारस्वत, बजरंगलाल रतावा, डॉ. वैभव सारस्वत, सुरेश कुमार जोशी,फत्तुराम,लोकेश, राकेश ,शकुंतला जोशी उमा व्यास, आशा दाधीच,निर्मला चौधरी तथा मनीषा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।