शौहदा ए कर्बला की याद में ढाई मण हलीम खिचड़ा पकाकर किया वितरित 

शौहदा ए कर्बला की याद में ढाई मण हलीम खिचड़ा पकाकर किया वितरित 

शौहदा ए कर्बला की याद 

ढाई मण हलीम खिचड़ा पकाकर किया वितरित 

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

सोजत। शौहदा ए कर्बला की याद में मुहर्रम के मौके पर हलीम खिचड़ा पकाना और बांटना और खिलाना बहुत पुण्य सबाव का काम माना जाता है इसी उद्देश्य को लेकर मोहल्ला शेखान शहर, खरादियो की मस्जिद के पास ढाई मण हलीम बना कर खिलाया गया।

आपको बता दें कि यह पकवान पौष्टिक होने के साथ-साथ सब्र और सेवा-भाव का प्रतीक माना जाता है। खिचड़ा दाल, चावल और दूसरी चीज़ों से बना एक पौष्टिक व्यंजन है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मानने वालों और राहगीरों को खाना खिलाना पुण्य का काम माना जाता है. इसीलिए मुहर्रम के दौरान खिचड़ा सामूहिक रूप से तैयार किया जाता है और लोगों को परोसा जाता है। यह परंपरा समाज में समानता और सहयोग की भावना को मज़बूत करती है। हलीम खिचड़ा बनाने के दौरान शाह मोहम्मद, नोमान खलीफा, पूर्व पार्षद आफाक अहमद शेख, फरहान खलीफा, इनायत अंसारी, ताज मोहम्मद, शौकीन शाह, शाहिद हुसैन शेख, मोहम्मद इकबाल शेख, जाफर अंसारी, मोहम्मद हुसैन गुड्डू, फैसल अंसारी, हाजी मकसूद हुसैन शेख, नासिर अंसारी, अनस हुसैन, समीर शाह, अयान अंसारी पाली आदि ने अपनी बेहतरीन सेवाएं दी।