राजस्थान की उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण - कविया 

राजस्थान की उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण - कविया 

राजस्थान की उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण - कविया 

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

मूंडवा - अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के संस्थापक लक्ष्मणदान कविया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ज्ञापन लिख कर राजस्थान प्रदेश की हो रही उपेक्षा की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया है। कविया ने ज्ञापन में लिखा कि हाल ही में केंद्र सरकार ने एमबीबीएस की सीटों में वृद्धि कर हर प्रदेश को लाभान्वित किया है लेकिन राजस्थान की सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक भी सीट नहीं बढ़ाई है। इससे प्रदेश के युवाओं में आक्रोश है जबकि शिक्षा एवं प्रतिभाओं में राजस्थान का युवा वर्ग किसी प्रदेश से पीछे नहीं है। कविया ने लिखा की केंद्र सरकार की ओर से राजस्थान प्रदेश के किसानों के लिए जो डीएपी खाद आवंटित किया था उसको नजरंदाज करते हुए 1.58 लाख मीट्रिक टन कम सप्लाई किया गया है। इसके दुष्परिणाम स्वरूप राजस्थान के किसानों को अपनी फसलों की बेहतरीन उपज से वंचित रहना पड़ेगा। केंद्र सरकार के इस निर्णय के विरूद्ध किसानों ने आवाज भी उठाई लेकिन उसको नहीं सुना गया।कविया ने लिखा कि राजस्थान प्रदेश की मातृभाषा राजस्थानी की बराबर उपेक्षा हो रही है। प्रदेश सरकार द्वारा पिछले 23 वर्षों में 20 से अधिक पत्र केंद्र सरकार को राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता के लिए लिखे लेकिन आज तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (2020)के तहत् बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में दिलाने का निर्णय लिया गया था लेकिन राजस्थान प्रदेश में छः वर्षों बाद भी प्रदेश के बच्चों को मातृभाषा राजस्थानी में शिक्षा नहीं दी जा रही है। इतना ही नहीं प्रदेश के विश्वविद्यालयों में बाहर के कुलगुरू थोपे जा रहे है जबकि राजस्थान प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। राजस्थान प्रदेश के युवाओं ने सेना में भर्ती होकर देश की सेवा के लिए सबसे अधिक बलिदान दिए है। इतना ही नहीं प्रदेश के व्यापारी बंधुओं ने अपनी प्रतिभा का डंका पूरे विश्व में बजा रखा है। कविया ने आगाह किया कि यदि राजस्थान प्रदेश की हर क्षेत्र में इसी तरह उपेक्षा होती रही तो प्रदेश का युवा अधिक दिन हाथ पर हाथ धरे बैठा नहीं रहेगा।