परशुराम महादेव मेले में रहेगा रोडवेज बसों का अभाव, सड़क भी दुरस्त नहीं
परशुराम महादेव मेले में रहेगा रोडवेज बसों का अभाव, सड़क भी दुरस्त नहीं पाली /परशुराम महादेव मेले इस वर्ष 18अगस्त को हैं मेले को लेकर फुटादेवल पर बैठक आयोजित की गई जिससे वहां के प्रशासन को तीर्थ की वास्तविक समस्या को समझ कर मौके पर निदान हो सके इस प्रकार की सोच देसूरी व पाली जिला प्रशासन में नहीं दिखी है। जिला प्रशासन ने सिर्फ प्रेस नोट जारी कर जिला मुख्यालय से निर्देश जारी कर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री करली वहीं देसूरी उपखण्ड प्रशासन ने सादड़ी पालिका में यह बैठक आयोजित की जिसमें परिवहन अधिकारी ने परशुराम महादेव मेले में सरकारी बसे लगाने से स्पष्ट मना किया।प्रशासन को बताना चाहिए कि मेले में यातायात की क्या सुविधा की गई हैं। सरकारी बसें या अवैध वाहन जीपे। प्रदेश का यह एक मात्र बड़ा मेला परशुराम महादेव का है जो लगातार दो माह तक चलता है मात्र दो माह में 30 लाख के करीब श्रद्धालु भगवान परशुराम महादेव के दर्शन को आते हैं फिर भी देसूरी व पाली का प्रशासन इतना गैर जिम्मेदार कैसे हो सकता है। हमारे राजनेताओं को भी फुर्सत नहीं है कि मेले की बैठकों में आकर श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं मिले इसके लिए प्रशासन पर दबाव बनाए। आगे पालिका चुनाव है i सादड़ी की जनता में अंडर ग्राउंड करंट दौड़ रहा है पालिका चुनावों में परशुराम महादेव तीर्थ की उपेक्षा कही भारी नहीं पड़ जाए। सरकार का उदासीन रवैया इस बात से जाहिर होता है कि दिसंबर 2023 मे सरकार ने 45 लाख रुपए स्वीकृत किए थे जिसमें एक रपट व घाट सेक्शन में सड़क की सीमेंटेड पटरिया बनानी थी सार्वजनिक निर्माण विभाग इस बजट को तीन साल तक दबाकर रखा। यहां जो अधिकारी सार्वजनिक निर्माण विभाग व वन विभाग में नियुक्त हैं वो भाजपा सरकार की छवि खराब करने में लगे हुए हैं लेकिन भाजपा नेताओं को यह बात अभी समझ में नहीं आएगी फिर पीछे पछताए चिड़िया चुग गई खेत। यही कहावत सही साबित होगी। सनातन धर्म के लोगों ki आस्था भगवान परशुराम महादेव में हैं सावन मास में पूरे माह श्रद्धांलुओं की दर्शनार्थ आवाजाही लगी रहती हैं। सड़के बिखरी पड़ी हैं घाट सेक्शन व गुमावदार रास्ता होने से सड़को का दुरस्त होना जरूरी हैं। लेकिन साल में एक बार जिला व ब्लॉक स्तर पर मेले से पूर्व प्रशासन खानापूर्ति के लिए मीटिंग कर चर्चा करते हैं धरातल पर काम नहीं होते। यात्रियों को जोखिम उठानी पड़ती हैं ऐसे बड़े मेले में आवागमन के लिए रोडवेज के पास बसें नहीं हैं? कुंडधाम से परशुराम महादेव गुफा तक चट्टान गिरने का भी भय बना रहता हैं फिर भी भोलेनाथ के दर्शन करने श्रद्धालू जोखिम उठाते हैं प्रशासन सुलियत के नाम पर मुकदर्शक बना बैठा हैं।