डॉ. अम्बेडकर के विचार राष्ट्र की एकता और समरसता के आधारस्तंभ - धन्नाराम 

डॉ. अम्बेडकर के विचार राष्ट्र की एकता और  समरसता के आधारस्तंभ - धन्नाराम 
डॉ. अम्बेडकर के विचार राष्ट्र की एकता और  समरसता के आधारस्तंभ - धन्नाराम 

डॉ. अम्बेडकर के विचार राष्ट्र की एकता और समरसता के आधारस्तंभ - धन्नाराम 

श्रद्धेय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन

पाली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा सोमवार को गांधी मूर्ति के पास स्थित माली समाज भवन में श्रद्धेय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर एक भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बाबा साहेब के जीवन उनके संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

जिला संघचालक नेमीचंद अखावत कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि गोष्ठी के मुख्य वक्ता जोधपुर प्रान्त के प्रान्त सह कार्यवाह धन्नाराम ने अपने सारगर्भित संबोधन में कहा कि बाबा साहेब केवल एक संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने कहा की बाबा साहेब का मानना था कि कानून द्वारा दी गई स्वतंत्रता के साथ ही सामाजिक स्वतंत्रता भी होना अत्यंत आवश्यक है। उनके विचार हमें समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति के उत्थान और सामाजिक समरसता की प्रेरणा देते हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलकर जाति-पाति के भेद को मिटाकर एक सशक्त और संगठित राष्ट्र का निर्माण करें। उन्होंने आगे कहा कि अम्बेडकर जी ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा और उनका 'शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो' का नारा आज भी युवाओं के लिए सबसे बड़ा मंत्र है। जब बाबासाहेब का जन्म हुआ, उस समय देश 700-800 वर्षों की पराधीनता से स्वतन्त्रता के लिए लड़ रहा था। सदियों से चल रहे इस संघर्ष के चलते समाज में अनेक कुरीतियां आ गईं थीं। जो अच्छी बातें थीं, वे पीछे छूट गई थीं, जो अनुपयोगी था वह हमारे साथ आ गया। बाहरी आक्रमणों के समय प्राणों की रक्षा मूल्यवान थी किसी भी तरह से प्राण बच जाएं इस कारण हमारे देश में महिलाओं में परदा प्रथा जातिप्रथा तथा छुआछूत जो पहले नहीं थी वह भी आ गई। वेद-उपनिषदों में अस्पृश्यता का उल्लेख नहीं है। जब ऐसी कुरीतियां समाज में आ जाती हैं तो हिन्दू समाज में कोई न कोई समाज सुधारक पैदा होता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ पारस खीची ने की वहीं मुख्य अतिथि रमेश सोलंकी रहे। गोष्ठी में उपस्थित डॉ देवा राम, तृप्ति पांडे ने बाबा साहेब के प्रेरक जीवन पर अपने विचार रखे उन्होंने कहा की बाबा साहेब का जीवन किसी एक वर्ग के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए हैं। बाबा साहेब ने समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए जो वैचारिक क्रांति शुरू की थी उसे आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने गौशाला और सामाजिक संगठनों की भूमिका को भी समरसता से जोड़ा।

कार्यक्रम के प्रारंभ में बाबा साहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलन किया गया। गोष्ठी में शहर के प्रबुद्ध नागरिक सामाजिक कार्यकर्ताओं और मातृशक्ति ने बड़ी संख्या में भाग लिया। विभाग संघचालक माननीय सुरेशचन्द्र माथुर ने सभी आगंतुको का धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में बालिकाओ द्वारा वंदेमातरम् स्तुति के साथ कार्यक्रका समापन हुआ।