बाल साहित्य के मुहावरे युगीन बदलाव चाहते हैं--डा विकास दवे 

बाल साहित्य के मुहावरे युगीन बदलाव चाहते हैं--डा विकास दवे 

बाल साहित्य के मुहावरे युगीन बदलाव चाहते हैं--डा विकास दवे 

रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

     कोटा । बाल साहित्य के मुहावरे युगीन बदलाव चाहते हैं । भाषा के प्रति हम आग्रही नहीं हो सकते, जहां दुराचार हो रहा है, वहां बच्चों को हिंसा का सही अर्थ बताना जायज़ है।ये विचार डॉ विकास दवे निदेशक मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी भोपाल ने कृति लोकार्पण " हाड़ौती अंचल का बाल साहित्य उद्भव और विकास" कृतिकार डॉ युगल सिंह के समारोह और बाल साहित्यकार सम्मान समारोह 2025 में व्यक्त किए। राष्ट्र भक्ति के लिए आज़ चंद्र शेखर आजाद प्रसांगिक है। संस्कार विहिन संतति आज समाज में व्याप्त दुःख का मूल कारण है।वो समारोह के मुख्य अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता कर रहे देश के ख्यातनाम विद्वान डॉ दिविक रमेश ने कहा कि मैंने बाल साहित्य एक परिपक्व साहित्यकार बनने के बाद प्रारंभ किया मेरी पहली रचना ही पंजाब में पांचवीं कक्षा में पढाई जाने लगी। उन्होंने कहा कि रचनाकार की सम्प्रेषणियता सहज ही आती है।जब आप किसी बच्चे से बात करेंगे तो तुतलाना स्वत: ही आजाएगा। वर्तमान समय में बच्चों से मित्र भाव बहुत जरूरी है। कोटा के अरुण सेदवाल ने मेरी कविताओं का हिंदी में अनुवाद किया था। वर्तमान में मेरे कहानी संग्रह " मेरी बालमन की कहानियां" का अनुवाद राजस्थानी भाषा में कोटा के साहित्यकार जितेन्द्र निर्मोही कर रहे हैं। विशिष्ट अतिथि ओम प्रकाश क्षत्रिय रतनगढ़ मप्र ने कहा कि किसी भी अंचल के साहित्यकारो पर केंद्रित कृति उस अंचल के साहित्यकार की पहचान बनाती है। वर्तमान समय बाल साहित्य की विसंगतियों का समय है। दुर्ग छत्तीसगढ़ से आये बलदाऊ राम साहू ने कहा कि किसी भी अंचल में लिखा गया आंचलिक भाषा का साहित्य उसकी पहचान है।इस कृति में भी राजस्थानी भाषा के रचनाकार हैं। कृति पर बोलते हुए कार्यक्रम संरक्षक जितेन्द्र निर्मोही ने कहा यह कृति मेरी बाल साहित्य की यात्रा जैसी है जिसका स्वयं उद्भव और विकास है। मुझे बाल साहित्य लिखने के लिए बाल कवि बैरागी ने प्रेरित।इस अवसर उन्होंने कहा " सभी किरदार है इस कहानी के कोई छोटा बड़ा क्या". यह कृति मील का पत्थर सिद्ध होगी। कृति पर बोलते हुए मुख्य वक्ता जयसिंह आशावत ने कहा निस्संदेह यह कृति जितेन्द्र निर्मोही जी के माध्यम से डॉ युगल सिंह द्वारा सृजित दस्तावेजी सौगात,जिसका कथ्य भाषा और शिल्प लाजवाब है। कृति लगती ही नहीं की समीक्षात्मक कृति है।इस अवसर पर कृतिकार डॉ युगल सिंह ने भी अपनी बात सामने रखी। लोकार्पण सत्र का संचालन रामनारायण मीणा हलधर ने किया।

        इससे पूर्व सत्र में भी मुख्य अतिथि डॉ विकास दवे निदेशक मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी भोपाल थे अध्यक्षता डॉ दिविक रमेश ने की थी। सत्र के प्रारंभ में सरस्वती पूजा के उपरांत सरस्वती वंदना इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा अनंदिता शर्मा ने करी। स्वागत भाषण श्वेता शर्मा ने दिया। यह सम्मान सत्र था इसमें लगभग चौदह अमृत सम्मान, पांच अतिविशिष्ट सम्मान,बीस विशिष्ट सम्मान किये गए। अतिविशिष्ट सम्मान दिवंगत बाल साहित्यकार उमानंदन चतुर्वेदी, गोकुल चंद्र पडिहार, संतोष पारिक नीरव के परिजनों को दिया गया।यह सम्मान डॉ गीता सक्सेना और ओम प्रकाश क्षत्रिय रतनगढ़ को दिया गया। विशिष्ट सम्मान पच्चीस रचनाकारों को दिये गए। जितेन्द्र निर्मोही ने कहा कि यह सम्मान अकादमी सम्मान के सदृश्य है जो बाल साहित्य के प्रति समर्पित बाल साहित्यकारों को दिये गये हैं।इस सत्र में विशिष्ट अतिथि डॉ प्रभात सिंघल, डॉ गीता सक्सेना और रेखा पंचोली अध्यक्ष आर्यन लेखिका मंच कोटा थे।

         विद्वानों का कथन था कि यह इस शताब्दी का सर्वश्रेष्ठ बाल साहित्यकार सम्मान समारोह था। ऐसे आयोजन मुश्किल होते हैं।इस आयोजन में विश्वामित्र दाधीच, रामेश्वर शर्मा रामू भैया,जे पी मधुकर, प्रेम शास्त्री, श्यामा शर्मा, डॉ अर्चना शर्मा, रीता गुप्ता, भगवती प्रसाद गौतम, सुमन शर्मा आदि विद्वानों ने भाग लिया।इस सत्र का संचालन नहुष व्यास ने किया और परिचय डॉ वैदेही गौतम ने दिया। कोटा महानगर की विभिन्न संस्थाओं ने कृतिकार डॉ युगल सिंह का सम्मान किया।