संत वचनाराम राठौड़ ने ली दीक्षा, जयकारों से गूंज उठा पांडाल

संत वचनाराम राठौड़ ने ली दीक्षा, जयकारों से गूंज उठा पांडाल

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा हर्षोल्लास से सम्पन्न 

संत वचनाराम राठौड़ ने ली दीक्षा, जयकारों से गूंज उठा पांडाल 

वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल समद राही 

सोजत। श्री पूर्णेश्वर धाम में आयोजित श्रीमद्भागवत गीता कथा महोत्सव का आज सातवां एवं अंतिम दिन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। अंतिम दिन कथा श्रवण के लिए हजारों श्रद्धालु प्रातःकाल से ही पंडाल में उमड़ पड़े। श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से संपूर्ण धाम भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया। कथा वाचन के दौरान संत गोविंद गिरी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, विशेषकर सुदामा चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कृष्ण-सुदामा की मित्रता, त्याग और करुणा से परिपूर्ण प्रसंग सुनकर पंडाल में उपस्थित अनेक श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं की आंखें नम हो गईं। महाराज श्री ने गीता के उपदेशों के माध्यम से मानव जीवन में भक्ति, कर्म और सदाचार का महत्व विस्तार से बताया। इस पावन अवसर पर एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रसंग भी देखने को मिला। संत श्री गोविंद गिरी जी महाराज द्वारा श्री वचनाराम राठौड़ को संत उपाधि प्रदान कर उन्हें "संत श्री वचानाराम जी राठौड़" की उपाधि से विभूषित किया गया तथा गुरु मंत्र का उपदेश दिया गया। वहीं संत श्री गुरु शरणानंद जी ने गुरु-मित्रों के साथ संत उपाधि प्रदान कर आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।

इसके साथ ही उपासनाधारी संत वचनाराम राठौड़ ने आज वानप्रस्थ आश्रम की दीक्षा ग्रहण कर आध्यात्मिक जीवन की नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया। सात दिनों तक चले इस भव्य श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। कथा के माध्यम से कर्म, भक्ति, वैराग्य और मोक्ष का संदेश दिया गया, जिससे श्रोताओ को जीवन में सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली।

अंतिम दिन कथा के समापन अवसर पर पूर्णाहुति, हवन, महाआरती एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। भजन-कीर्तन, जयकारों और शंखध्वनि से श्री पूर्णेश्वर धाम गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर बताते हुए इसे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला अनुभव बताया।कार्यक्रम का कुशल संचालन मंच संचालक ओम आचार्य, द्वारा किया गया। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक भी कथा स्थल पर पहुंचे और भक्ति का आनंद लिया। स्थानीय पत्रकारों ने संत श्री गोविंद गिरी जी महाराज एवं संत श्री वचानाराम जी का माल्यार्पण कर सम्मान किया।